महिला दिवस पर गढ़वाल विवि के अधिकारी-कर्मचारी महिला कर्मचारी सुनीता कठैत को सम्मानित करते हुए
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पिता का सहारा छूटा तो घर की जिम्मेदारियां आ गईं। जिम्मेदारियां निभाईं तो शादी के बाद पति का देहांत हो गया। यह भी कम नहीं था और सुनीता गंभीर बीमारी (ब्रेस्ट कैंसर) की चपेट में आ गईं। इन परिस्थितियों में भी सुनीता ने हार नहीं मानी। अकेले होने के बाद भी टूटी नहीं और बीमारी से लड़ीं। अब वह स्वस्थ हैं और आरटीआई सेल में कार्यरत हैं। कुदरत ने सुनीता को कई जख्म दिए लेकिन लोगों ने उनकेजज्बे को सलाम किया। यहीं वजह है कि बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने उन्हें सम्मानित किया।
विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने वाली सुनीता कठैत को अन्य महिलाओं के लिए भी रोल माडल मानते हुए महिला दिवस पर सम्मानित किया गया। इस दौरान गढ़वाल विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने कर्मचारियों ने कहा कि विवि की महिला कर्मचारी को प्रत्येक वर्ष महिला दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
गढ़वाल विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने कर्मचारी नेता रविंद्र सिलवाल ने कहा कि सुनीता ने ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी को भी मात दी है। साथ उनका जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है। 22 वर्ष की उम्र में उनके पिता का देहांत हो गया था। जिस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी सुनीता के कंधों पर आ गई। सुनीता ने तीन बहिनों व एक भाई की पढ़ाई व शादी की पूरी जिम्मेदारी निभाई।
वर्ष 1996 में शादी के छह माह बाद हीउनके पति की मौत होने व ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी से जूझने के बाद भी वह मानसिक रूप से टूटी नहीं। बीमारी व हालातों से लड़ने के जब्जे ने उन्हें हारने नहीं दिया। गढ़वाल विवि के प्रथम लोक सूचना अधिकारी डा. वाईएस फर्स्वाण ने कहा कि सुनीता कठैत अपने कार्य के प्रति बहुत ही गंभीर है। सम्मानित करने वालों में विवि सुरक्षा अधिकारी हेम जोशी, पुष्कर सिंह चौहान, जसवंत सिंह, ललित भट्ट आदि शामिल थे।
महिला कर्मचारियों किया जाना चाहिए सम्मानित
श्रीनगर। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का कहना है कि विवि प्रशासन को महिला दिवस के अवसर पर समाज में विशिष्ट उदाहरण पेश करने वाली विवि की महिला कर्मचारियों को सम्मानित करना चाहिए। कर्मचारी नेता रविंद्र सिलवाल ने कहा कि विवि प्रशासन केवल गोष्ठियों तक ही सीमित रहता है।