पिछले महीने शेरे कश्मीर मेडिकल इंस्टीट्यूट (स्कीमस) में स्वाइन फ्लू के शिकार मरीजों में से इंस्टीट्यूट के ही एक कर्मचारी की सोमवार को मौत हो गई। मौत के बाद घाटी में स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। कश्मीर में स्वाइन फ्लू से यह दूसरी मौत है। पहली बार स्वाइन फ्लू से वर्ष 2009 में भी एक व्यक्ति की मौत हुई थी।
सोमवार को स्वाइन फ्लू से स्कीमस के सीनियर असिटेंट गुलाम हस्सन की मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने स्वाइन फ्लू के रोगियों की गहनता से उपचार और देखरेख शुरू कर दी है। स्कीमस के निदेशक शौकत अहमद जरगर के मुताबिक इंस्टीट्यूट में स्वाइन फ्लू की पर्याप्त मात्रा में दवाएं मौजूद हैं।
अहमद ने कहा कि फ्लू का खतरा वृद्ध और बच्चों पर जल्दी हो जाता है। जिसकी वजह से मरीजों का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होने की वजह से वायरस और तेजी से हमला करता है। उन्होंने कहा कि परवेज कोल इंस्टीट्यूट में स्वाइन फ्लू के प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर हैं। वह स्थिति पर बराबर नजर रखे हुए हैं।
डॉ. परवेज कोल के मुताबिक क्षेत्रों से विभिन्न फ्लू के रोगी सोवरा पहुंचते हैं। रोगियों की हालत बेहतर होने के बाद घर भेज दिया गया है। इस दौरान कश्मीर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सलीमु रहमान ने राज्य में स्वाइन फ्लू को लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने को कहा है। लोग पीड़ित के संपर्क में आने से बचें।
उन्होंने पीड़ितों को सलाह दी की वे अपनी नाक और मुहं को कपड़े से पूरी तरह ढककर रखें। खांसने और छींकने समय भी सामान्य लोगों का बचाव करें। पीड़ित भीड़ से दूर रहें और हमेशा अपने हाथ साबुन से धोते रहें। लोग अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखें। जिससे स्वाइन फ्लू वायरस की चपेट में आने से बचा जा सकता है।