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J&K: उर्दू भाषा के संरक्षण की मांग को लेकर PDP का प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरी इल्तिजा मुफ्ती

Tue, 28 Apr 2026 02:24 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

पीडीपी ने नायब तहसीलदार और पटवारी भर्ती परीक्षाओं में उर्दू को अनिवार्य सूची से हटाने के विरोध में श्रीनगर में प्रदर्शन किया, जिसकी अगुवाई इल्तिजा मुफ्ती ने की। प्रदर्शनकारियों ने इसे जम्मू-कश्मीर की पहचान पर हमला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा और फैसले को वापस लेने की मांग की।
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श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
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विस्तार
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नायब तहसीलदार और पटवारी पद की भर्ती परीक्षाओं में उर्दू भाषा को अनिवार्य सूची से हटाने के विरोध में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की अगुवाई पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने की।
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श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
धरने में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने लाल चौक की ओर बढ़ने से रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने उर्दू हमारी शान है जैसे नारे लगाए और फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई।

श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
इल्तिजा ने कहा कि पीडीपी उर्दू भाषा को बचाने के लिए यह धरना दे रही है। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना उनका कानूनी हक है। उर्दू को जम्मू-कश्मीर की पहचान और विरासत का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
उमर सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में भाषा और विरासत को मिटाया जा रहा है उस समय मुख्यमंत्री बंगलूरू जाकर मैराथन में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पर आरोप लगाया कि उसका इतिहास ही कश्मीर के मुद्दों पर खामोश रहने का रहा है।

श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
इल्तिजा ने गांदरबल, शोपियां और सोपोर की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गांदरबल में एक बेगुनाह को मारा गया। शोपियां में एक दारुल उलूम को बंद किया गया और सोपोर में आठ युवाओं पर पीएसए लगाया गया लेकिन फिर भी उमर अब्दुल्ला की सरकार इन सभी मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
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श्रीनगर में पीडीपी का प्रदर्शन - फोटो : बासीत जरगर
मुफ्ती ने कहा, उर्दू जम्मू-कश्मीर के लोगों को जोड़ने वाली भाषा है और इसे खत्म करने की साजिश की जा रही है। कश्मीर के पुराने रिकॉर्ड उर्दू में हैं और अगर ऐसे लोगों को नियुक्त किया जाएगा जिन्हें उर्दू नहीं आती तो यह आम जनता के साथ बड़ी नाइंसाफी होगी।
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