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योजनाओं के क्रियान्वयन पर मांगा स्पष्टीकरण

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श्रीनगर। अधीनस्थ विधान विषयों की संसदीय कमेटी ने वीरवार को अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन यहां देश के बिजली हितधारकों के साथ मुलाकात के दौरान सभी से मंत्रालय द्वारा स्थापित बुनियादी ढांचे सहित कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह भी पूछा कि वह इस दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं से कैसे निपट रहे हैं।
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प्रताप सिंह बाजवा की अध्यक्षता में आई समिति ने देश के बिजली क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले कुछ नियमों विनियमों पर चर्चा की। उन्होंने सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों में बिजली क्षेत्र के अधिकारियों और प्रबंधन से कुछ मुद्दों पर बात की और स्पष्टीकरण मांगा। अध्यक्ष ने कहा, इस समिति का गठन राज्यसभा ने यह जांचने और रिपोर्ट करने के लिए किया गया है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रायोजित नियम, विनियम, उप नियम आदि बनाने की शक्तियों का कार्यकारी अधिकारियों द्वारा ठीक से प्रयोग किया जा रहा है या नहीं। समिति ने हितधारकों के साथ केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग व्यापार लाइसेंस और अन्य संबंधित मामलों के अनुदान के लिए प्रक्रिया, नियम और विनियमन 2020 पर चर्चा की।
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जम्मू-कश्मीर में दूर होगा विद्युत संकट
केंद्रीय संयुक्त सचिव (विद्युत) ने बताया कि केंद्र सरकार एक राष्ट्र, एक ग्रिड और एक फ्रीक्वेंसी पर काम कर रही है। भारत में सभी बस्तियों में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। प्रमुख सचिव, जेकेपीडीडी रोहित कंसल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर अपने ग्राहकों को उचित दरों पर विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने की राह पर है। जम्मू-कश्मीर अगले 5 वर्षों में बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे काफी हद तक बिजली संकट को दूर हो जाएगा।
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