पर्यटन पर टिका 20 हजार लोगों का भविष्य संकट में
गुजरात से आए एक पर्यटक दल की सदस्य गीतिका कहती हैं कि मैं तीन साल पहले भी यहां आई थी, तब भीड़ उमड़ी रहती थी। आज ऐसा लग रहा है मानो यह वो पहलगाम ही नहीं है। होटल भी लगभग खाली हैं, रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई डर नहीं लगा।
लोगों को यहां आना चाहिए और कश्मीर के लोगों का साथ देना चाहिए।स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, पर्यटन पर निर्भर करीब 20 हजार लोगों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है। पहले जहां प्रतिदिन 15,000 तक पर्यटक आते थे, अब यह संख्या गिरकर 10 प्रतिशत पर सिमट गई है।
होटल मालिक, टैक्सी चालक, घोड़ेवाले, एटीवी ऑपरेटर, दुकानदार सभी इस मंदी की मार झेल रहे हैं। होटल व्यवसायी बिलाल अहमद ने बताया कि हमले के बाद पहलगाम जैसे खाली हो गया। इस समय हम पिछले साल से ज्यादा पर्यटकों की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हुआ उल्टा। 90 फीदसी तक बुकिंग रद्द हुई है और कई होटल व रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं।
धीरे-धीरे लौट रहे हैं पर्यटक, लेकिन संख्या अब भी बेहद कम है
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अब तक का आर्थिक नुकसान हजारों करोड़ रुपये में आंका जा रहा है। कुछ पर्यटक लौटने लगे हैं, लेकिन संख्या काफी कम है। स्थानीय प्रशासन पर्यटन स्थलों को फिर से खोलकर सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रहा है। पर्यटन से जुड़े हितधारकों ने भी भारी छूट जैसे कदमों की घोषणा कर पुनर्जीवन की उम्मीद जताई है।
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