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दहशत का सीधा असर कारोबार पर: आतंकी वारदातों से जम्मू-कश्मीर को बड़ा नुकसान, पर्यटन और रोजगार पर संकट

Sat, 01 Aug 2026 12:00 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

आतंकी घटनाओं का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पर्यटन, कारोबार, रोजगार और निवेश पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
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कुलगाम में आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन, बागवानी, व्यापार और सेवा क्षेत्र पर टिकी है। ऐसे में हर बड़ी आतंकी घटना की आंच इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबार और रोजगार तक भी पहुंचती है। पिछले दस वर्षों का अनुभव बताता है कि ऐसी घटनाओं के बाद सबसे पहले पर्यटन की रफ्तार थमती है और धीरे-धीरे इसका असर पूरी आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई देने लगता है।

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अप्रैल 2025 में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद भी यही तस्वीर देखने को मिली। बड़ी संख्या में पर्यटकों ने यात्राएं रद्द कर दीं या बीच में ही लौट गए। सुरक्षा समीक्षा के बाद प्रशासन ने 87 में से 48 पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इसका सीधा असर होटल, टैक्सी, हाउसबोट, ट्रेवल एजेंसियों और स्थानीय बाजारों पर पड़ा। प्रदेश में पर्यटन केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार पर्यटन का प्रदेश की जीएसडीपी में करीब सात प्रतिशत योगदान है और इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से लगभग पांच लाख लोगों की आजीविका जुड़ी है। बागवानी क्षेत्र भी इससे जुड़ा है। कृषि और बागवानी समेत प्राथमिक क्षेत्र का प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत से अधिक योगदान है। सेब और अन्य फसलों के मौसम में दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर आते हैं। ऐसे में पर्यटन और परिवहन प्रभावित होने का असर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।
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होटल से बाजार तक पड़ता है असर
जम्मू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर शैलेंद्र सूदन का कहना है कि किसी भी आतंकी घटना का पहला असर पर्यटन पर पड़ता है। पर्यटकों की संख्या घटते ही होटल, टैक्सी, हाउसबोट, ट्रेवल एजेंसियां, रेस्तरां और स्थानीय बाजार प्रभावित होने लगते हैं। हस्तशिल्प, ड्राई फ्रूट और पर्यटन से जुड़े दूसरे कारोबार भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में निजी निवेशक नई परियोजनाओं को लेकर सतर्क हो जाते हैं।

निवेश और विकास की रफ्तार भी होती है प्रभावित
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के अर्थशास्त्री प्रो. अश्वनी नंदा के अनुसार आतंकवाद का आर्थिक असर तत्काल और दीर्घकालिक दोनों होता है। स्थानीय कारोबार की आय घटती है, निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है और सरकार को सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तथा विश्वास बहाली पर अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रहें तो विकास परियोजनाएं, रोजगार सृजन और निजी निवेश तीनों प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि आर्थिक विकास के लिए शांति और स्थिरता सबसे जरूरी है।
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