उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को एक बड़ी भीड़ (लगभग 5000-6000 लोग) ने सरकारी भवनों और राजनीतिक कार्यालयों को क्षतिग्रस्त किया, पुलिस और सुरक्षा बलों पर पथराव किया। सीआरपीएफ के जवानों पर बर्बरता हुई, जिनमें से एक गंभीर रीढ़ की चोट के साथ अस्पताल में भर्ती है। वहीं, आग लगने वाले एक भवन में चार महिला पुलिसकर्मी भी थीं। बाद में एक और बड़ी भीड़ वहां पहुंची और उस बिल्डिंग पर भी हमला किया। सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिसमें चार लोगों की मौत हुई।
डीजीपी ने बताया कि पहले दिन 32 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से 17 सीआरपीएफ के और 15 लद्दाख पुलिस के थे। बाद में यह संख्या बढ़कर 70-80 तक पहुंच गई। साथ ही, 70-80 नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर है। एक युवती को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एयरलिफ्ट किया गया है और 6-7 लोग अभी भी लद्दाख के अस्पताल में भर्ती हैं।
उन्होंने खुद भी इस हिंसा में घायल हुए, लेकिन मामूली चोटों के साथ बच गए। उन्होंने कहा कि यह हिंसा असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर हमला करके शुरू हुई और इसमें काफी आगजनी व पथराव हुआ।
विदेशी दखल के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि जांच में तीन नेपाली नागरिक घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए और दो अन्य को पकड़ा गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि वे जानबूझकर शामिल थे या नहीं, क्योंकि यहां कई नेपाली मजदूर के तौर पर आते रहते हैं। मामले की जांच जारी है।