बैठक में फिल्म फेस्टिवल की रूपरेखा, स्क्रीनिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल प्रचार, उद्योग जगत के साथ साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी जैसे विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की निदेशक श्रेया सिंघल ने फेस्टिवल की प्रस्तावित रूपरेखा प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मक क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाना है। ताकि देश-विदेश के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, कलाकार और सिनेमा प्रेमी इसमें भाग लें।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह आयोजन पर्यटन, निवेश, रोजगार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का माध्यम भी बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय फिल्मकारों, लेखकों, निर्देशकों, कलाकारों, तकनीशियनों, फोटोग्राफरों, डिजाइनरों, शिल्पकारों और अन्य रचनात्मक पेशेवरों को इस आयोजन से सक्रिय रूप से जोड़ा जाए।
यह भी कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत की हस्तियों के बीच मास्टरक्लास, कार्यशालाएं, पैनल चर्चा, मेंटरशिप और संवाद सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि युवाओं को वैश्विक अनुभव, तकनीकी जानकारी और नए अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने उन कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, संगीतकारों और अन्य सिनेमा हस्तियों को सम्मानित करने का भी सुझाव दिया, जिन्होंने वर्षों से जम्मू-कश्मीर की फिल्मी विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रस्तावित चार दिवसीय इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सितंबर 2026 में आयोजित किया जाएगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, भारतीय सिनेमा, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्में, छात्र फिल्में, एनीमेशन, क्षेत्रीय सिनेमा, इंडस्ट्री फोरम, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। यह आयोजन श्रीनगर के विभिन्न स्थानों पर किया जाएगा।