गढ़वाल विवि में छात्रों को अब प्रवेश के दौरान ही परीक्षा आवेदन पत्र भरना होगा। पूर्व में प्रवेश आवेदन पत्र व परीक्षा आवेदन पत्र अलग-अलग भरे जाते थे। परीक्षा परिणाम समय से घोषित हों इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर पौड़ी, टिहरी व देहरादून में केंद्रीय मूल्यांकन कराया जाएगा।
उक्त निर्णय गढ़वाल विवि की विद्या परिषद (एकेडमिक काउंसिल) की बैठक में लिए गए। बुधवार को गढ़वाल विवि के चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में कुलपति प्रो. जवाहर लाल कौल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में परीक्षा आवेदन पत्र के अलावा यूजीसी की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन पर नई नियुक्तियों व पीएचडी के नियमों में बदलाव को लेकर ऑर्डिनेंस बनाए जाने के लिए अहम निर्णय लिए गए।
पीएचडी ऑर्डिनेंस में बदलाव को लेकर प्रो. एआर नौटियाल की अध्यक्षता में पीएचडी ऑर्डिनेंस कमेटी का गठन किया गया। पीएचडी के नए रेगुलेशन के तहत शोधार्थी अब तीन साल से पहले अपनी पीएचडी थीसिस जमा नहीं कर पाएंगे। अब तक शोधार्थी के लिए यह समय सीमा न्यूनतम दो वर्ष थी। जबकि अधिकतम सीमा पांच साल के स्थान पर अब छह साल हो गई है।
महिला शोधार्थियों को इसमें और छूट दी गई है। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर की नई नियुक्तियों में ओबीसी व क्रीमिलियर से नीचे के अभ्यर्थियों को स्नातक व परास्नातक के अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
कुलपति प्रो. जेएल कौल ने निर्देश दिए कि परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर पौड़ी, टिहरी व देहरादून में केंद्रीय मूल्यांकन कराया जाय। बैठक में कुलसचिव डा. एके झा, डीएसडब्लू प्रो. जेपी पचौरी, मुख्य नियंता एचबीएस चौहान, प्रो. आरसी शर्मा, प्रो. केडी पुरोहित, प्रो.जेपी भट्ट, प्रो. हिमांशु बौड़ाई, प्रो. ओके बेलवाल आदि मौजूद रहे।
एमटेक के लिए करना होगा इंतजार
श्रीनगर। गढ़वाल विवि में एमटेक की कक्षाएं संचालित किए जाने के लिए कुलपति ने स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के डींस को बीओएस (बोर्ड ऑफ स्टडीज) के माध्यम से प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव को विद्या परिषद की अगली बैठक में रखा जाएगा। यहां प्रस्ताव पास होने के बाद एमटेक की कक्षाएं संचालित होंगी।