रामलीला मैदान में आतिशबाजी की दुकान लगाने को लेकर विरोध के पीछे चल रहा आदर्श रामलीला समिति का घमासान खुलकर सामने आ गया है। बीते दिवस तीन संरक्षकों समेत कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने कार्यकारिणी भंग कर दी थी। वहीं रविवार को दूसरे पक्ष ने तीनों संरक्षकों समेत 9 सदस्यों को निष्कासित कर दिया।
रविवार को समिति के संरक्षक टीसी थपलियाल, बुद्धि बल्लभ उनियाल व प्रह्लाद भट्ट और उपाध्यक्ष दीपक उनियाल सहित कुछ अन्य सदस्यों ने समिति को भंग करते हुए संरक्षकों को अग्रिम कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंप दी थी। सदस्यों का आरोप था कि अध्यक्ष एवं महासचिव ने विश्वास में लिए बगैर मैदान को आतिशबाजी की दुकानों के लिए देने का निर्णय ले लिया। साथ ही रामलीला आयोजन के लिए चंदा लिया। जबकि रामलीला का आयोजन नहीं हुआ। इसके अलावा रामलीला समिति के संरक्षक जयदेव सडाना की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि समिति के उपाध्यक्ष दीपक उनियाल ने पदाधिकारियों को सूचित किए बिना बैठक बुलाकर समिति की मर्यादा भंग की है। समिति के महासचिव मुकेश अग्रवाल ने बताया कि तीनों संरक्षक, उपाध्यक्ष दीपक उनियाल, आशीष उनियाल, अतुल उनियाल, नवीन उनियाल, सागर अग्रवाल व भानेष असवाल को निष्कासित कर दिया गया है। दूसरी ओर अध्यक्ष आदर्श रामलीला समिति श्रीनगर राजेंद्र कैंतुरा का कहना है कि सदस्यों को समिति भंग करने का अधिकार नहीं है। यह पहले ही तय हो गया था कि यदि रामलीला होगी, तो चंदे की राशि वहां खर्च की जाएगी। रामलीला का आयोजन न होने पर चंदे की राशि सुरक्षित है। कहा कि पुलिस की ओर से मुझे यह नहीं बताया गया था कि थाने में आयोजित होने वाली बैठक में आतिशबाजी की दुकान के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।