विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। यह सीमा सुरक्षा, पहचान प्रणाली और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े करता है। जम्मू के भठिंडी में आज रोहिंग्या की घनी आबादी है। इनका बड़ा बाजार है।
घरों में पानी और बिजली के कनेक्शन हैं। राजनीतिक संरक्षण में बड़ी संख्या में ये मतदाता भी बना दिए गए हैं। ऐसे में अब ये बस जनसांख्यिकीय ही नहीं राजनीतिक बदलाव के भी कारक बन गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जम्मू में रोहिंग्या की बसावट वर्ष 2008 से शुरू हुई। 2012 व 2017 के मध्य इनकी संख्या में तेजी आई। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अब यह धीरे-धीरे जम्मू से आगे बढ़ते हुए कश्मीर तक पहुंच गए हैं। मई 2026 में हरियाणा के नूह से रोहिंग्या के 45 परिवार फिर यहां आए हैं। आज जम्मू के नरवाल, सुंजवा, भठिंडी और कासिम नगर में इनकी झुग्गियां बढ़ती जा रही हैं।
पाकिस्तान, जम्मू, पंजाब और नेपाल तक नार्को टेरर नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठियों का पाकिस्तान, जम्मू, पंजाब, हरियाणा और नेपाल तक का नार्को टेरर नेटवर्क भी सामने आया है। नशा तस्कर इनको हैंडलर के रूप में उपयोग कर रहे हैं। नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर के सौ दिवसीय विशेष अभियान में इनकी गिरफ्तारी भी हुई है। केंद्रीय एजेंसियों की जांच में इनकी संलिप्तता पाकिस्तान बॉर्डर से लेकर नेपाल तक पाई गई है। कठुआ से लेकर कश्मीर तक का मजबूत नेटवर्क एजेंसियों की परेशानी बढ़ा रहा है। वर्ष 2024-25 में नेपाल से सटे देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती जिलों में भी घुसपैठियों की मौजूदगी मिल चुकी है।
एक्सपर्ट कमेंट
ऐसे मामलों में सीमा पार से घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज, किराये के मकान, छोटे कारोबार की आड़ और स्थानीय संपर्कों का उपयोग जैसे पैटर्न सामने आए हैं। हालांकि, हर मामला अलग होता है। रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठिया जम्मू-कश्मीर के लिए धीरे-धीरे घातक होते जाएंगे। इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाना होगा। -संदीप सेठ, रक्षा विशेषज्ञ
सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की बसावट से होने वाला बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक है। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील प्रदेश में यह सुनियोजित साजिश है। कश्मीर घाटी में योजनाबद्ध तरीके से ऐसे लोगों को बसाया जा रहा है। हमें ऐसे स्थानों पर लोगों की पहचान सत्यापन को गंभीरता से लेना होगा। सुरक्षा एजेंसियों, स्थानी पुलिस व प्रशासन को इस तरह के बदलाव पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। -डॉ. विजय सागर धीमान, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त)