मोहसिन ने कहा, 'वाटर स्पोर्ट्स मेरा जुनून है और मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखता हूं। अपने सपनों को साकार करने के लिए मैं शिकारा चलाता हूं और अपने परिवार का बोझ बांटता हूं। मैंने आज की इस स्पर्धा के लिए कड़ी मेहनत की थी और मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक था जो मैंने आखिरकार हासिल किया। आज की इस जीत को मैं अपने पर हावी होने नहीं दूंगा और आगे के लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत करूंगा।'
डल झील के अन्दरून कंद मोहल्ला निवासी मोहसिन ने सात साल की उम्र में वाटर स्पोर्ट्स में अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने बताया कि अपने पिता के अलावा वह जम्मू और कश्मीर कयाकिंग और कैनोइंग एसोसिएशन को भी इसका श्रेय देते हैं। उन्होंने कहा, 'वे मेरी सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि एसोसिएशन ने मुझे आवश्यक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा प्रदान किया।'
मोहसिन की उपलब्धि इस बात को ध्यान में रखते हुए उल्लेखनीय है कि हालांकि उन्होंने ज़्यादा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लिया है फिर भी वे अन्य एथलीटों, जिनके पास उनसे ज़्यादा अनुभव और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुभव है, पर विजय प्राप्त करने में सफल रहे।
उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में देश का प्रतिनिधित्व करने की तीव्र इच्छा ही मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। मोहसिन का मानना है कि कश्मीर के उच्च पर्वतीय क्षेत्र में स्थित डल झील के पानी में अभ्यास करने से बेहतर सहनशक्ति विकसित होती है, जो देश भर के अन्य एथलीटों में नहीं होती।
गौरतलब है कि खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल 2025 में स्वर्ण पदक मोहसिन के करियर के लिए ज़रूरी प्रोत्साहन बन सकता है। फिलहाल मोहसिन सुर्खियों में आने के अपने पल का आनंद ले रहे हैं।
जम्मू और कश्मीर कैनोइंग और कयाकिंग एसोसिएशन (जेकेसीकेए) के अध्यक्ष शफकत वटाली ने अमर उजाला के साथ बात करते हुए कहा कि मोहसिन का स्वर्ण पदक जीतना यहां वाटर स्पोर्ट्स के लिए एक लैंडमार्क है। इस खिलाड़ी की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए, जिस उम्र से हमारी विश्व प्रसिद्ध कोच बिलकीस मीर ने उसे आठ साल की उम्र से कोचिंग देना शुरू की बिना किसी अधिक समर्थन के, इसने ऐसे खिलाड़ियों को आज हराया जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है.