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Srinagar News: घाटी में बेमौसम बारिश व ठंड से स्ट्रॉबेरी की पैदावार में 25 प्रतिशत गिरावट

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श्रीनगर के हजरतबल क्षेत्र के गस्सू में स्ट्रॉगेरी ​चुनता किसान। संवाद
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- किसान बोले, फल पकने में देरी हुई और फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो गया
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर के मशहूर स्ट्रॉबेरी उगाने वाले किसानों के लिए यह साल मुश्किल भरा साबित हो रहा है। बेमौसम बारिश और ठंड की वजह से पैदावार में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे सैकड़ों किसान परिवार बढ़ते नुकसान और घटती कमाई को लेकर चिंतित हैं।
वर्ष 2025 में अच्छी फसल के बाद पूरे कश्मीर में स्ट्रॉबेरी की पैदावार 2,500 से 3,500 मीट्रिक टन के बीच होने का अनुमान था। किसानों का कहना है कि 2026 का मौसम निराशाजनक रहा है। मार्च और अप्रैल के महीनों में बेमौसम बारिश और लंबे समय तक चली ठंड की वजह से पैदावार में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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घाटी की स्ट्रॉबेरी बेल्ट जो श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल और अनंतनाग जिले के कुछ हिस्सों में फैली हुई है। इस मौसम में कम पैदावार दिख रही है जबकि बाजारों में इसकी मांग अभी भी ज्यादा है। कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स-कम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बशीर अहमद ने कहा कि मौसम में आए बदलावों ने फूलों के खिलने व फलों के विकास को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल की अच्छी फसल के बाद कई किसानों को इस साल भी बंपर पैदावार की उम्मीद थी लेकिन बार-बार हुई बारिश ने फलों की मात्रा और गुणवत्ता, दोनों को कम कर दिया। स्ट्रॉबेरी एक बहुत ही नाजुक फसल है जिसकी सेल्फ लाइफ बहुत कम होती है। किसान पहले से ही दबाव में काम करते हैं क्योंकि फलों को जल्दी बेचना पड़ता है। श्रीनगर के बाहरी इलाके खिंबर के स्ट्रॉबेरी के खेतों में किसानों ने बताया कि जो मौसम कभी जल्दी मुनाफा दिलाता था वह अब बदलते मौसम के मिजाज की वजह से लगातार अनिश्चित होता जा रहा है।
एक किसान मोहम्मद रमजान ने कहा कि ठंड की वजह से फल पकने में देरी हुई और फसल का एक बड़ा हिस्सा खराब हो गया। फूलों के खिलने के दौरान हुई बारिश ने परागण पर असर डाला जिससे कई बेरी या तो सड़ गई या ठीक से बढ़ नहीं पाईं। किसान अभी एक किलो के डिब्बे लगभग 200 रुपये में बेच रहे हैं लेकिन इससे होने वाली कमाई से ट्रांसपोर्ट, मजदूरी और खेती का खर्च भी मुश्किल से ही निकल पाता है।
उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि स्ट्रॉबेरी से बहुत ज्यादा मुनाफा होता है क्योंकि बाजारों में यह फल महंगा दिखता है लेकिन असलियत बहुत अलग है। हम इस फल को ज्यादा समय तक स्टोर करके नहीं रख सकते। अगर खरीदार समय पर नहीं आते तो कुछ ही घंटों में फसल खराब हो जाती है। एक अन्य किसान फारूक अहमद डार ने बताया कि कई किसानों को नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उन्होंने सीजन शुरू होने से पहले ही खाद, मल्चिंग शीट और सिंचाई पर भारी निवेश कर दिया था।
डार ने कहा कि पिछले साल के बाद हमें अच्छी फसल की उम्मीद थी लेकिन कुदरत ने हमारा साथ नहीं दिया। लगातार नमी की वजह से फल खराब हो गया और उसकी मिठास भी कम हो गई। जब क्वालिटी खराब होती है तो व्यापारी भी कम दाम देते हैं। किसानों ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की कमी और ट्रांसपोर्ट की सही व्यवस्था न होने से उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। कई किसानों को अपनी फसल तुरंत ही जो भी दाम मिले, उस पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि स्ट्रॉबेरी बिना सही रेफ्रिजरेशन के लंबी यात्रा में खराब हो जाती है।
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कई किसानों ने मौसम में बढ़ती अनिश्चितता पर भी चिंता जताई और कहा कि कश्मीर में मौसम के अजीबोगरीब पैटर्न अब ज्यादा आम होते जा रहे हैं। पहले मौसम स्थिर रहता था। अब अचानक बारिश या अप्रत्याशित ठंड महीनों की कड़ी मेहनत को बर्बाद कर सकती है। इन मुश्किलों के बावजूद, किसानों ने कहा कि वसंत के मौसम में सैकड़ों परिवारों के लिए स्ट्रॉबेरी की खेती अभी भी कमाई का एक अहम जरिया बनी हुई है।
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