कर्नल सोनम वांगचुक अमर रहें... के नारों से गूंजा लेह
अंतिम शवयात्रा में कर्नल सोनम वांगचुक अमर रहें के नारे बुलंद हुए। दोपहर करीब डेढ़ बजे फूलों से सजे वाहन में स्टेडियम में लाए गए कर्नल वांगचुक के पार्थिव शरीर को सेना की लद्दाख स्काउट्स के जवानों ने हवा में तीन चक्र फायर कर अंतिम सलामी दी। दो मिनट का माैन रखा गया। माैके पर कर्नल वांगचुक के साथ कारगिल में लड़े लद्दाख स्काउट्स के कई सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पूर्व सैनिकों ने कारगिल की वीरता को किया याद
कर्नल सोनम वांगचुक के अंतिम संस्कार के दौरान भावनाएं चरम पर थीं जब त्सेरिंग स्तोबदन (ऑनरेरी कैप्टन, वीर चक्र) ने अपने पूर्व कमांडर को श्रद्धांजलि देते हुए कारगिल युद्ध में उनकी वीरता को याद किया। स्टोबदान ने बताया कि मई 1999 में उनकी यूनिट करु से कारगिल के लिए रवाना हुई थी। चोरबत ला क्षेत्र में अभियान के दौरान सैनिकों को बर्फ से ढके कठिन इलाके में दुश्मन की फायरिंग का सामना करना पड़ा। एक साथी हवलदार रिगजिन बलिदान हो गए। इसके बावजूद सैनिकों ने पुनर्गठित होकर कर्नल (उस समय मेजर रहे) वांगचुक के नेतृत्व में रात में समन्वित हमला किया। मोर्टार फायर और सही रणनीति से उन्होंने दुश्मन सैनिकों को मार गिराया। उनके हथियार कब्जे में ले लिए। यह बड़ी सफलता थी।