संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। वरिष्ठ लद्दाखी शिक्षाविद, प्रख्यात राजनयिक और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ राजदूत फुंचोक स्तोबदन का निधन हो गया। उन्होंने अपने पीछे विशिष्ट जनसेवा और विद्वता की विरासत छोड़ी है।
विश्लेषक, लेखक और शिक्षाविद के रूप में सम्मानित स्तोबदन एशिया और यूरेशिया की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर गहरी पकड़ रखते थे। उन्होंने भारत सरकार की नीतिनिर्माण प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और हिमालयी मामलों, विशेषकर भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों से निकटता से जुड़े रहे।
उन्होंने किर्गिज़स्तान में भारत के राजदूत के रूप में विशिष्ट सेवाएं दीं और हिमालयी भू-राजनीति तथा सामरिक अध्ययन के प्रमुख विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाई। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद, लेह के पूर्व अध्यक्ष ताशी ग्यालसन ने स्तोबदन को लद्दाख के सबसे प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों में से एक तथा भारत के सामरिक और शैक्षणिक जगत की महान हस्ती बताया।
उन्होंने कहा कि स्तोबदन का निधन केवल लद्दाख ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि कूटनीति, शोध, लेखन और सामरिक मामलों में उनके योगदान ने अमिट छाप छोड़ी है। ग्याल्सन ने बताया कि स्तोबदन लद्दाख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के संस्थापक अध्यक्ष भी थे जो आज भी क्षेत्र में संवाद, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दे रहा है। स्टैनजिन डोल्कर, क्षेत्रीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने लद्दाख महिला कांग्रेस की ओर से शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई। लद्दाख भर के नेताओं, विद्वानों और प्रशंसकों ने शोक जताया है।