संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख प्रशासन ने होटलों और गेस्टहाउसों को विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नई वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटन से बढ़ते कचरे के बीच उच्च हिमालयी क्षेत्र के नाजुक वातावरण की रक्षा करना है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट इंसेंटिव स्कीम, 2025 के तहत, पर्यटन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में पात्र हॉस्पिटैलिटी यूनिट्स को उपकरण लागत का 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति (अधिकतम 5 लाख रुपये) प्रदान की जाएगी। साथ ही महिला-स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन भी मिलेगा। यह पहल अपशिष्ट जल के अनियंत्रित उत्सर्जन को रोकने पर केंद्रित है, जो सीमित जल संसाधनों और नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा पैदा करता है।
अधिकारियों ने बताया कि 10 से 19 कमरों वाले होटल और गेस्टहाउस जो लद्दाख की आवास क्षमता का बड़ा हिस्सा हैं। इस योजना का मुख्य लक्ष्य हैं क्योंकि क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बिना उपचारित सीवेज को बढ़ते खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है, जो जल स्रोतों, वेटलैंड्स और मिट्टी को प्रदूषित करने के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रतिष्ठानों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या लद्दाख प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा अनुमोदित तकनीक अपनानी होगी और साथ ही कंसेंट टू एस्टैब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट की अनिवार्य स्वीकृतियां भी प्राप्त करनी होंगी। प्रतिपूर्ति डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से स्थापना और दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद की जाएगी।
पर्यटन विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्सर्जन मानकों से किसी भी प्रकार का विचलन या स्थापित प्लांटों को संचालित करने में विफलता की स्थिति में धन-वसूली और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे प्रतिष्ठान जो पहले से किसी समान सरकारी प्रोत्साहन का लाभ ले चुके हैं, इस योजना के पात्र नहीं होंगे।
पर्यटन विभाग और लद्दाख प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा समय-समय पर निरीक्षण की योजना बनाई गई है ताकि नियमों का पालन और प्रणाली का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जा सके। ये योजना स्वैच्छिक है। हालांकि अधिकारियों को व्यापक भागीदारी की उम्मीद है क्योंकि पर्यावरण संरक्षण को अब पर्यटन विकास से सीधे जोड़ा जा रहा है।
योजना को और मजबूत करने के लिए, प्रशासन ने होटल मालिकों, पर्यटन संगठनों, पर्यावरण समूहों, स्थानीय समुदायों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं। परिचालन चुनौतियों, तकनीकी विकल्पों और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन संबंधी सुझावों के आधार पर योजना में अंतिम लागू होने से पहले संशोधन किए जा सकते हैं।