संवाद न्यूज एजेसी
लेह। दुनिया के सबसे कठिन भूभागों में से एक में शारीरिक तैयारी को मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रयासों को प्रदर्शित करते हुए सेक्टर मुख्यालय लद्दाख के डीआईजी शैलेश कुमार जोशी ने चोगलमसर में 5वीं बटालियन की ओर से आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह कार्यक्रम बल की ओजस त्रैमासिक एडवेंचर गतिविधियों के तहत आयोजित किया गया जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात कर्मियों की सहनशक्ति और परिचालन फिटनेस पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के फोकस को रेखांकित करता है। मैराथन की शुरुआत साबू चौक से हुई जिसमें प्रतिभागियों ने बाईपास रोड होते हुए सोलर कॉलोनी और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्धिस्ट स्टडीज, चोगलमसर के मार्ग से होते हुए 5वीं बटालियन परिसर में प्रवेश किया।
कार्यक्रम की निगरानी कमांडेंट मनीष भाटिया ने की। लेह स्थित विभिन्न इकाइयों से लगभग 150 भारत-तिब्बत सीमा पुलिस कर्मियों ने भाग लिया जो सामूहिक प्रशिक्षण और फील्ड रेडीनेस के प्रति बल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कर्मियों ने शून्य से नीचे तापमान वाली सुबह और कठोर हिमालयी भूभाग का सामना करते हुए उल्लेखनीय साहस और उत्साह के साथ दौड़ पूरी की। अधिकारियों ने बताया कि मैराथन का उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धी भावना को बढ़ावा देना और इकाइयों के बीच समन्वय को मजबूत करना था, जो संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बटालियन परेड ग्राउंड में आयोजित संक्षिप्त समापन समारोह में डीआईजी जोशी के साथ नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर के डीआईजी रंजन मलिक ने भी प्रतिभागियों को सम्मानित किया। दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शित उच्च फिटनेस मानकों की सराहना की और कहा कि एडवेंचर-आधारित प्रशिक्षण परिचालन क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
शीर्ष धावकों को पुरस्कृत किया गया और अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि टीम वर्क, अनुशासन और शारीरिक दक्षता को बढ़ावा देने के लिए ऐसी पहलें आगे भी जारी रहेंगी।