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Srinagar News: पीएम ने हेमिस मठ की पांडुलिपियों को सराहा, लद्दाख की विरासत को मिला राष्ट्रीय मंच

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हेमिस मठ का प्रांगण।फाइल फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
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लेह। लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शनिवार को हेमिस मठ के महत्व को रेखांकित किया।

इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भारतीय जनता पार्टी के लेह स्थित मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष ताशी ग्याल्सन खाचू सहित पूर्व पार्षदों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने देखा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मठ में संरक्षित प्राचीन तिब्बती पांडुलिपियों के दुर्लभ संग्रह की ओर ध्यान आकर्षित किया जिन्हें भारत ज्ञान पोर्टल के तहत दस्तावेजीकृत और डिजिटल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह सर्वेक्षण मध्य जून तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य अमूल्य ज्ञान को संरक्षित कर वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराना है।
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अधिकारियों के अनुसार ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं बल्कि इनमें प्राचीन विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और खगोल विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी शामिल हैं।

यह डिजिटलीकरण पहल ज्ञान भारतम मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य देशभर की पांडुलिपियों, विशेषकर लद्दाख के मठों में संरक्षित धरोहर को सुरक्षित रखना और दस्तावेजीकृत करना है। यह प्रयास इन नाजुक पांडुलिपियों को प्राकृतिक या आकस्मिक नुकसान से बचाने के लिए भी किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में यह प्रक्रिया 16 मार्च से शुरू हुई है और फिलहाल सर्वेक्षण चरण में है, जिसके बाद संरक्षण और अंतिम डिजिटलीकरण किया जाएगा। क्षेत्र के सभी मठ इस पहल में शामिल हैं और केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान के विद्वान पांडुलिपियों के अध्ययन और वर्गीकरण में लगे हुए हैं।

लद्दाख कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के उप सचिव त्सेवांग पलजोर ने इसे क्षेत्र की प्राचीन विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम के बाद प्रदेश अध्यक्ष ताशी ग्यालत्सन खाछू ने प्रधानमंत्री द्वारा सांस्कृतिक संरक्षण पर दिए गए जोर की सराहना करते हुए कहा कि इससे लद्दाख की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और स्थानीय समुदायों को अपनी परंपराओं पर गर्व करने की प्रेरणा मिलती है।

द्रुक्पा परंपरा से संबंधित हेमिस मठ जिसका पुनर्निर्माण 1672 में राजा सेंगे नामग्याल ने कराया था, क्षेत्र का एक प्रमुख बौद्ध केंद्र माना जाता है। यह गुरु पद्मसंभव को समर्पित वार्षिक हेमिस उत्सव के लिए भी प्रसिद्ध है।
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प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके ज्ञान में निहित है और इस डिजिटलीकरण पहल को आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण बताया।
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