- नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सीडी देशमुख ऑडिटोरियम में अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड में पहुंचे लद्दाख के उपराज्यपाल
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्रर गुप्ता ने रविवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सीडी देशमुख ऑडिटोरियम में अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड में भाग लिया। इस दाैरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सभ्यागत चेतना की अभिव्यक्ति है।
एलजी ने पुरस्कार वितरण एवं अमृत कुंभ सम्मान समारोह 2026 को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संचार की भाषा नहीं है। भाषा किसी भी ष्ट्र की परंपराओं, मूल्यों और सांस्कृतिक निरंतरता का सार अपने भीतर समाहित करती है तथा बौद्धिक आत्मनिर्भरता की आधारशिला होती है। कार्यक्रम को भाषाई जागरूकता का महाकुंभ बताते हुए कविंद्र गुप्ता ने कहा कि वैश्वीकरण के युग में सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय शक्ति का सबसे मजबूत स्तंभ है और भाषा उसका सबसे प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाषाई आत्मविश्वास के बिना सच्ची स्वतंत्रता अधूरी है तथा मातृभाषा में सोचने, नवाचार करने और सृजन करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चरित्र दोनों मजबूत होते हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद हिंदी को राष्ट्रीय एकता के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी मानते थे। सभी मातृभाषाओं का सम्मान करते हुए उनका विश्वास था कि हिंदी विविध क्षेत्रों को जोड़ सकती है और ज्ञान को जनसामान्य तक पहुंचाकर भारत की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करते हुए भाषा के माध्यम से वास्तविक राष्ट्रीय जागरण को बढ़ावा दे सकती है।
उन्होंने कहा कि इंडिया एआई समिट में प्रधानमंत्री का हिंदी में दिया गया संबोधन एक सशक्त संदेश था कि अत्याधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर वैश्विक विमर्श के दौरान भी भारत अपनी भाषा में आत्मविश्वास के साथ अपनी दृष्टि प्रस्तुत करता है। भारत की बहुभाषी विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की पूरक है और विविध क्षेत्रों के बीच एक सेतु का कार्य करती है। उन्होंने साहित्य और प्रशासन से आगे बढ़कर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, डिजिटल नवाचार तथा न्यायपालिका में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय भाषाओं को ज्ञान और नवाचार के माध्यम के रूप में बढ़ावा मिलने के अवसरों को भी रेखांकित किया।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड के विजेताओं तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को उनकी उत्कृष्टता और समर्पण के लिए अमृत कुंभ सम्मान से सम्मानित किया गया। आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उपराज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा पर गर्व करने, शैक्षणिक एवं डिजिटल क्षेत्रों में हिंदी के उपयोग को सुदृढ़ करने तथा सभी भारतीय भाषाओं के समृद्धिकरण में योगदान देने का आह्वान किया।
लद्दाख सांस्कृतिक शक्ति व आध्यात्मिक गहराई का प्रतीक
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को उपराज्यपाल ने सांस्कृतिक शक्ति, आध्यात्मिक गहराई और देशभक्ति की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने लद्दाख की समृद्ध भाषाई विविधता, जिसमें लद्दाखी, बाल्टी और पुरगी शामिल हैं, का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी क्षेत्र को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समारोह की अध्यक्षता हिंदी ओलंपियाड फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश वत्स ने की जबकि हेमलता ने कार्यक्रम का समन्वयन करते हुए हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार हेतु फाउंडेशन की पहलों का विवरण प्रस्तुत किया।