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Srinagar News: एलजी कविंद्र गुप्ता ने वन्यजीव क्षेत्रों के संरक्षण हेतु समिति गठित करने के दिए निर्देश

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लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने राज्य वन्यजीव बोर्ड की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की, स्रोत
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लद्दाख के उपराज्यपाल ने राज्य वन्यजीव बोर्ड की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने राज्य वन्यजीव बोर्ड की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश में किसी भी वन्यजीव संरक्षण अथवा सीमा युक्तिकरण प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी। इस दौरान उन्होंने वन्यजीव क्षेत्रों के संरक्षण हेतु समिति गठित करने के निर्देश दिए।

उपराज्यपाल ने लद्दाख में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा का नेतृत्व किया जिसमें विशेष रूप से वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं के युक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा, स्थानीय समुदायों की आजीविका की सुरक्षा तथा लद्दाख की विशिष्ट एवं संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों का संरक्षण तीनों के बीच समन्वय आवश्यक है।
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अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एस. राजेश ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जंगली जानवरों के बचाव एवं पुनर्वास, मानव–वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण, वन्यजीव अध्ययनों, संरक्षण परामर्श जारी करने तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठकों में परियोजना स्वीकृतियों से संबंधित भागीदारी के बारे में बोर्ड को अवगत कराया।

उपराज्यपाल ने वन्यजीव वार्डन मनदीप मित्तल द्वारा प्रस्तुत एजेंडा पर भी संज्ञान लिया जिसमें कराकोरम (नुब्रा-श्योक) वन्यजीव अभयारण्य और उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल (चांगथांग वन्यजीव) अभयारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण से जुड़े मुद्दे शामिल थे। प्रस्तुति में वर्ष 1987 की मूल अधिसूचनाओं में मौजूद विसंगतियों तथा दोनों अभयारण्यों और हेमिस राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं में असंगतियों को रेखांकित किया गया।

विस्तृत चर्चा के दौरान उपराज्यपाल ने सेना, अर्धसैनिक बलों, पुलिस, स्थानीय समुदायों और वन्यजीव विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया। यह भी नोट किया गया कि वर्तमान प्रस्तावों के तहत लद्दाख का एक बड़ा भू-भाग संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत आ सकता है, जिससे संचालन, विकास और प्रशासनिक स्तर पर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

उपराज्यपाल ने इस बात से सहमति जताई कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण संचालनात्मक और रणनीतिक क्षेत्रों को विशेषकर संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रखा जाना चाहिए। उन्होंने लद्दाख पुलिस द्वारा विकासात्मक पहलों जिनमें वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और प्रशासनिक पुनर्गठन शामिल हैं, से संबंधित उठाए गए मुद्दों पर भी संज्ञान लिया।

प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. एम.के. रंजीतसिंह ने लद्दाख को एक राष्ट्रीय धरोहर परिदृश्य बताते हुए स्पष्ट रूप से परिभाषित कोर संरक्षण क्षेत्रों, मौसमी वन्यजीव गलियारों तथा सुरक्षा और सामुदायिक आवश्यकताओं के लिए जरूरी क्षेत्रों को रणनीतिक रूप से बाहर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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बैठक के समापन पर उपराज्यपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं को अंतिम रूप देने में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने मुख्य सचिव की देखरेख में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ एक समिति के तत्काल गठन के निर्देश दिए जो सेना की बस्तियों और आवश्यक आबादी वाले क्षेत्रों को बाहर रखते हुए कोर वन्यजीव क्षेत्रों की पहचान और सीमांकन करेगी।
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