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Srinagar News: लद्दाख बौद्ध संघ ने ट्रोलिंग पर तोड़ी चुप्पी, बताया बौद्धों और मुसलमानों के बीच दरार डालने की हो रही कोशिश

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एलबीए अध्यक्ष तथा लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष त्सेरिंग दोरजे लकरूक ने इन हमलों को बताया समुदायों को बांटने की कोशिश
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। सोशल मीडिया पर बढ़ती ट्रोलिंग के बीच लद्दाख बौद्ध संघ (एलबीए) ने अपनी भूमिका का स्पष्ट बचाव किया है। एलबीए अध्यक्ष तथा लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष त्सेरिंग दोरजे लकरूक ने इन हमलों को समुदायों को बांटने और क्षेत्रीय एकता को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश बताया।


उन्होंने बताया कि शुरुआत में इन अविश्वसनीय आरोपों का जवाब नहीं दिया गया लेकिन अब दुष्प्रचार बढ़ने के कारण संगठन की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो गया है। उन्होंने लद्दाख के लोगों से आग्रह किया कि वे नए उभरे समूहों के पीछे के व्यक्तियों की पृष्ठभूमि गंभीरता से परखें।
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लकरूक ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से सांप्रदायिक सामग्री फैलाकर बौद्धों और मुसलमानों के बीच तथा लेह और कारगिल के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि यह गतिविधियां असामान्य स्वतंत्रता के साथ हो रही हैं, जिससे प्रशासनिक उदासीनता का संदेह होता है। उन्होंने कहा कि एलबीए को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि यह लेह एपेक्स बॉडी का केंद्रीय स्तंभ है और लद्दाख की राज्य का दर्जा तथा छठी अनुसूची जैसी मूल मांगों को प्राथमिकता देता रहा है। लकरूक ने लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के बीच मतभेद के दावों को खारिज किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों निकायों के बीच सभी निर्णय साझा सहमति और संयुक्त रूप से लिए जाते हैं। किसी एक पक्ष के वर्चस्व का कोई सवाल ही नहीं उठता। हाल ही में सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के ड्राफ्ट को लेकर फैली अफवाहों को भी उन्होंने गलत बताया।

उन्होंने बताया कि लेह एपेक्स बॉडी और केडीए द्वारा अलग-अलग मसौदे तैयार किए गए थे और विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद एपेक्स के मसौदे को अंतिम रूप देकर प्रस्तुत किया गया। नए संगठनों द्वारा प्रतिनिधित्व की मांग पर उन्होंने कहा कि केवल समूह बना लेने से प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं मिल जाता।
लकरूक ने जोर देकर कहा कि ऐसे कोई भी निर्णय एलबीए की जनरल काउंसिल द्वारा ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिए जा सकते हैं। संघ पर राजनीतिक होने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एलबीए न तो चुनाव लड़ता है और न ही किसी राजनीतिक दल का समर्थन करता है।

लद्दाख की स्थिति पर उन्होंने कहा कि सतह पर हालात सामान्य लग सकते हैं, लेकिन जनता का असंतोष बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक स्थिति को पूरी तरह सामान्य नहीं कहा जा सकता। हालांकि, विकास कार्यों में एलबीए प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग करता रहेगा।

पूर्व उपाध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर उन्होंने आरोपों के समय और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल के दौरान ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
लकरूक ने चोखांग में निर्माणाधीन नए गोंपा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और लगभग 90 प्रतिशत ढांचा पूरा हो चुका है। अगले सत्र में दीवारों का कार्य शुरू होगा और परियोजना के अगले तीन वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
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मंदिर निर्माण जनसहयोग से किया जा रहा है, जबकि पार्किंग और कार्यालय परिसर जैसी बाहरी सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार वित्तपोषण करेगी। अंत में उन्होंने कहा कि एकता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं और जनभागीदारी ही लद्दाख को उसकी चुनौतियों और आकांक्षाओं के मार्ग पर आगे ले जाएंगी।
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