लद्दाख के उपराज्यपाल ने प्रगति मैदान में ‘बिटवीन विंड एंड वूल : लद्दाख डिजाइन टुडे’ प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रगति मैदान में राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी के इनोवेशन गैलरी में आयोजित प्रदर्शनी बिटवीन विंड एंड वूल: लद्दाख डिजाइन टुडे का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जीवंत परंपराओं को सार्वजनिक मंच पर लाया जाना जरूरी है।
यह प्रदर्शनी टेक्सटाइल गैलरी-2 परंपरा और नवाचार के अंतर्गत स्थित इनोवेशन गैलरी का हिस्सा है जो भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं की समकालीन व्याख्याओं को समर्पित एक मंच है। प्रदर्शनी में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार समकालीन डिजाइनर कताई, बुनाई, रेजिस्ट-डाइंग और परिधान निर्माण जैसी पारंपरिक विधाओं को आधुनिक रूपों और डिजाइनों में ढालते हुए भी सांस्कृतिक स्मृति से जुड़े रहते हैं।
प्रदर्शनी में प्रमुख लद्दाखी डिजाइनरों की कृतियां प्रदर्शित की गई हैं जिनमें 2112 सालडोन, जिग्मत नोरबू और जिग्मत वांगमो (जिग्मत कुट्योर), पद्मा यांगचन (नमजा कुट्योर) तथा स्टांजिन पाल्मो द्वारा जिलजोम शामिल हैं। इनकी रचनाओं में मूर्तिकला रूपी इंस्टॉलेशन, पारंपरिक एवं औपचारिक परिधान, अनुष्ठानिक वस्तुएं, तथा हस्तनिर्मित ऊनी और पश्मीना परिधान शामिल हैं जो लद्दाख के गहरे आध्यात्मिक, पर्यावरणीय और भौतिक संबंधों को प्रतिबिंबित करते हैं।
अपने संबोधन में उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां न केवल पारंपरिक वस्त्रों के संरक्षण और पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं बल्कि लद्दाख की संपूर्ण सांस्कृतिक विरासत जिसमें स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां, शिल्पकला, अनुष्ठान, जीवनशैली और सामुदायिक परंपराएं शामिल हैं की रक्षा में भी सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि इन जीवंत परंपराओं को सार्वजनिक मंच पर लाने से उन्हें विस्मृति में जाने से रोका जा सकता है। सांस्कृतिक गौरव को बल मिलता है और भावी पीढ़ियों तक सार्थक रूप से उनका हस्तांतरण सुनिश्चित होता है। साथ ही परंपरा को समकालीन संदर्भ से जोड़ा जाता है।
एलजी ने कहा कि लद्दाख की विशिष्ट वस्त्र विरासत को प्रदर्शित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की और प्रदर्शनियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच पारंपरिक कारीगरों, समकालीन डिजाइनरों और वैश्विक बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं जिससे दृश्यता, बाजार तक पहुंच और आजीविका के अवसर बढ़ते हैं तथा लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान सशक्त होती है।
उपराज्यपाल ने कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए लद्दाख प्रशासन की पहलों का भी उल्लेख किया जिनका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को पारंपरिक पश्मीना कौशल के साथ-साथ आधुनिक डिज़ाइन, गुणवत्ता नियंत्रण, ब्रांडिंग और विपणन का प्रशिक्षण देना है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का लक्ष्य सतत आजीविका सृजित करना और यह सुनिश्चित करना है कि लद्दाख की विरासत भविष्य की पीढ़ियों के लिए अवसर और आत्मनिर्भरता का स्रोत बनें।