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Srinagar News: संकू और शकर चिकतान को अलग जिला घोषित करने की मांग हुई तेज

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- कारगिल ऑल पार्टी फ्रंट ने सांसद हनीफा जान की अगुआई में की पत्रकार वार्ता
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- दी चेतावनी, मांग को नजरअंदाज किया गया तो लोग तेज करेंगे विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल। कारगिल ऑल पार्टी फ्रंट ने वीरवार को संकू और शकर चिकतान के लिए अलग जिला का दर्जा देने की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख के हालिया पुनर्गठन में कारगिल क्षेत्र को लगातार प्रशासनिक उपेक्षा और अन्याय का सामना करना पड़ा है।

लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान के नेतृत्व में हुई पत्रकार वार्ता के दौरान जिसमें लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद कारगिल के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद जाफर अखून तथा राजनीतिक नेता, पार्षद, धार्मिक विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि कारगिल के लोग न्याय मिलने तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे।
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विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समूहों के नेताओं ने कहा कि यह संवाददाता सम्मेलन लद्दाख में नए जिलों के गठन को लेकर कारगिल के लोगों की चिंताओं को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कम राजस्व गावों और कम जनघनत्व वाले क्षेत्रों को जिला का दर्जा दिया गया, जबकि घनी आबादी वाले संकू, बरसू और शकर चिकतान जैसे क्षेत्रों को लंबे समय से चली आ रही मांगों के बावजूद नजरअंदाज किया गया। इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया कि 18 से 20 राजस्व गांवों वाले क्षेत्रों को जिला का दर्जा देते हुए लगभग 80 राजस्व गावों और काफी बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों की उपेक्षा क्यों की गई।

उन्होंने कहा, हम किसी के खिलाफ या किसी क्षेत्र के खिलाफ नहीं हैं। हम केवल अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार मांग रहे हैं। एक वक्ता ने कहा कि कारगिल के लोगों को लगता है कि प्रशासन के समक्ष बार-बार अपील और प्रतिनिधित्व के बावजूद उन्हें न्याय से वंचित किया गया है। नेताओं ने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण और 2019 में लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद के विकास की भी आलोचना की।
उनके अनुसार लद्दाख को लोगों की सहमति के बिना केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया जिससे लोकतांत्रिक सुरक्षा कमजोर हुई और चयनात्मक प्रशासनिक विभाजन हुए। सभागार ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक संस्थानों की कमी पर चिंता व्यक्त की, यह इंगित करते हुए कि कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अभी भी डिग्री कॉलेज, प्रशासनिक कार्यालय और पर्याप्त परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को विकास असंतुलन को दूर करना चाहिए और लद्दाख के सभी क्षेत्रों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए।

अंजुमन इंकलाब मेहदी और अन्य समुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मांग का समर्थन किया और राजनीतिक, सामाजिक तथा धार्मिक संस्थानों में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन को समन्वित करने और जन समर्थन जुटाने के लिए जल्द ही समितियां गठित की जाएंगी।

नेताओं ने लद्दाख के उपराज्यपाल, मुख्य सचिव और भारत सरकार से जनसंख्या, भूगोल और जन सुविधा के आधार पर मुद्दे की समीक्षा करने की अपील की। उन्होंने प्रशासन से अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेने से पहले उचित सर्वेक्षण और स्थानीय प्रतिनिधियों से परामर्श करने का भी आग्रह किया।

सम्मेलन के दौरान कई वक्ताओं ने समानता और न्याय के सांविधानिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा तो लोग विरोध तेज करेंगे और प्रस्तावित न्यू डिस्ट्रिक्ट मूवमेंट के तहत प्रदर्शन करेंगे।
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प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से सीधे अपील करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास का नारा सरकार की कारगिल के प्रति नीतियों में भी प्रतिबिंबित होना चाहिए।
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