संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। कांग्रेस पार्टी ने प्रस्तावित विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना का सोमवार को कड़ा विरोध जताया। पार्टी नेताओं का दावा है कि किसानों और आम नागरिकों ने भी इस नई पहल के खिलाफ आपत्ति जतानी शुरू कर दी है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार मनरेगा की परिकल्पना 1990 के दशक में की गई थी और व्यापक विचार-विमर्श के बाद 2005 में इसे लागू किया गया। इसके विपरीत वीबी ग्राम जी योजना को बहुत कम समय और सीमित सूचना के साथ पारित किया गया। नेताओं ने संसद में ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को जल्दबाजी में पारित करने के खिलाफ सावधानीपूर्वक विधायी समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि नई योजना में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार का वादा किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि योजना अभी तक लागू नहीं हुई है जिससे लाभार्थियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। नेताओं ने यह भी चिंता जताई कि फसल की बुवाई और कटाई के कारण लगभग 60 दिन प्रभावी रूप से कम हो सकते हैं जिससे वास्तविक लाभ घट सकता है। लद्दाख जैसे क्षेत्रों में जहां काम के लिए गर्मियों के सीमित महीने उपलब्ध होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोगों को पर्याप्त कल्याण मिल पाएगा।
पार्टी ने फंडिंग पैटर्न में बदलाव को भी रेखांकित किया। मनरेगा के तहत खर्च का अनुपात केंद्र और राज्यों के बीच 90:10 था जबकि प्रस्तावित 60:40 मॉडल आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल सकता है। पार्टी ने कार्यक्रम से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या यह बदलाव वास्तव में जनकल्याण के उद्देश्य के अनुरूप है।