लद्दाख के बौद्धों ने बोधगया में धरना दिया, स्रोत – सोशल मीडिया
लेह। लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन और ऑल लद्दाख गोंपा एसोसिएशन की पहल पर बौद्धों ने मंगलवार को बोधगया में धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने 1949 के बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति अधिनियम को निरस्त करने तथा महाबोधि महाविहार मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की।
इस शांतिपूर्ण धरने में लद्दाख से बड़ी संख्या में पुरुष-महिलाओं के साथ-साथ भिक्षु और भिक्षुणियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने देशभर में विभिन्न बौद्ध संगठनों द्वारा चलाए जा रहे समान आंदोलनों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। धरने के माध्यम से बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक के प्रबंधन से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को उजागर किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष छेरिंग दोरजे और ऑल लद्दाख गोंपा एसोसिएशन के अध्यक्ष वंदनीय दोरजे स्तांजिन ने कहा कि यह धरना ऑल इंडिया बौद्ध फोरम सहित विभिन्न बौद्ध संगठनों के समर्थन में आयोजित किया गया है जो 1949 के बीटीएमसी अधिनियम को निरस्त करने की जोरदार मांग कर रहे हैं।
उन्होंने भारत सरकार और बिहार सरकार से अपील की कि वे इस अधिनियम को निरस्त करने के लिए अनुकूल कदम उठाएं। यह उल्लेख करते हुए कि यह कानून 1950 में भारतीय संविधान के अंगीकरण से पहले बनाया गया था और अब बौद्ध समुदाय की आकांक्षाओं एवं अधिकारों को प्रतिबिंबित नहीं करता। नेताओं ने जोर दिया कि अत्यंत आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला महाबोधि महाविहार मंदिर पूरी तरह से बौद्ध समुदाय के प्रबंधन में होना चाहिए। संवाद