लाल चौक में दिखा अयोध्या जैसा नजारा
- फोटो : बासित जरगर
शनिवार शाम जैसे ही रामरथ लाल चौक के घंटाघर परिसर में दाखिल हुआ, वहां मौजूद पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया। रविवार शाम को आयोजित होने वाले दीपोत्सव के लिए घंटाघर के चारों ओर रंगोली और दीपकों की सुंदर शृंखलाएं सजाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। पिछले साल की तरह इस बार भी शाम ढलते ही सैकड़ों स्थानीय नागरिक, देश के कोने-कोने से पहुंचे पर्यटक और सुरक्षा बलों के जवान एक साथ मिलकर हजारों मिट्टी के दीये जलाएंगे।राम रथ के साथ आए आयोजक ज्योतिर्मठ के एक संन्यासी ने बताया कि वह यहां तीसरी बार दीपोत्सव मनाने आए हैं।
पहली बार कम संख्या में दीप लगाए थे लेकिन पिछले साल संख्या काफी बढ़ाई गई। अयोध्या में जिस तरह दीपोत्सव हुआ वैसे ही श्रीनगर में किया गया था। इस साल भी पूरा प्रयास रहेगा कि इसे और अधिक भव्य रूप दिया जा सके। जहां कभी हिंसा होती थी अब वही लाल चौक हर साल दीपोत्सव से दमक रहा है। कश्मीर वाकई में बदल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि कश्मीर का पुरातन वैभव वापस लौटे। महर्षि कश्यप की पवित्र भूमि पर इस तरह के आयोजन उसी का संकेत है।
आयोजकों के अनुसार, रविवार शाम करीब छह बजे लाल चौक पर विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भजन-संकीर्तन के बीच भगवान श्रीराम का दरबार सजेगा और। प्रशासन और पुलिस ने कार्यक्रम के शांतिपूर्ण और सुचारु संचालन के लिए चौक के आसपास यातायात प्रबंधन व सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। दीपोत्सव को लेकर श्रीनगर में आए पर्यटकों के बीच भी भारी कौतूहल है जो इस ऐतिहासिक स्थल पर कश्मीर के बदलते स्वरूप और इस आलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए उत्सुक हैं।
लाल चौक में दिखा अयोध्या जैसा नजारा
- फोटो : बासित जरगर
हमारी साझी तहजीब और कश्मीरियत की मिसाल
लाल चौक और आसपास के बाजारों के स्थानीय मुस्लिम व गैर-मुस्लिम दुकानदारों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि घाटी में अमन-चैन की यह बयार सबके चेहरों पर मुस्कान ला रही है। लाल चौक के व्यापारी मोहम्मद रफीक ने कहा कि कश्मीर हमेशा से साझी संस्कृति, भाईचारे और सूफियाना रिवायतों की जमीन रहा है। लाल चौक पर जब दिवाली के दीये जलते हैं और रोशनी बिखरती है, तो यह केवल एक पर्व नहीं बल्कि हमारी कश्मीरियत और अमन का पैगाम पूरी दुनिया में भेजता है।
लाल चौक में दिखा अयोध्या जैसा नजारा
- फोटो : बासीत जरगर
हम सब मिलकर इस आयोजन का स्वागत करते हैं।वहीं हस्तशिल्प विक्रेता बशीर अहमद ने बताया कि पिछले साल भी यहां बहुत खूबसूरत माहौल था। बाहर से आए पर्यटकों के साथ-साथ हम स्थानीय लोग भी इस रोशनी का हिस्सा बनते हैं। जब पर्यटक खुश होते हैं और सुरक्षित महसूस करते हैं, तो घाटी का व्यापार भी फलता-फूलता है। रविवार शाम का यह दीपोत्सव हमारे आपसी प्यार और एकता को और मजबूत करेगा।