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पांच करोड़ की राशि रुकने से लद्दाख में विकास प्रभावित होंगे : कारगिली

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-केडीए प्रमुख ने एलजी से वित्तीय शक्तियां वापस लेने के फैसले पर भी उठाए सवाल
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जैनब संधू
लेह। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रमुख सदस्य सज्जाद कारगिली ने लद्दाख के उपराज्यपाल से प्रमुख वित्तीय शक्तियां वापस लेने और हिल काउंसिल को दी गई पांच करोड़ की राशि रोकने के केंद्र मंत्रालय के निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह कदम लद्दाख के विकास और प्रशासनिक कार्यों को बुरी तरह प्रभावित करेगा।

विशेष बातचीत में करगिली ने कहा, लद्दाख में अत्यधिक जलवायु परिस्थितियों के कारण कार्य करने का समय पहले ही बहुत कम होता है। अब केंद्र मंत्रालय से छोटी-छोटी विकास परियोजनाओं की अनुमति लेने की नई प्रक्रिया विकास की गति को बेहद धीमा कर देगी। अनुमोदनों की यह लंबी प्रक्रिया पूरे क्षेत्र के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि लद्दाख राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है। यहां कोई विधानसभा नहीं है और पिछले छह वर्षों से पब्लिक सर्विस कमीशन न होने के कारण कोई नई भर्ती भी नहीं हुई है। यहां तक कि गजटेड पद भी खाली पड़े हैं। हम प्रशासनिक रूप से भी पूरी तरह शक्तिहीन हो गए हैं।
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उनका कहना है कि हालिया निर्णय से लद्दाख की वित्तीय स्वायत्तता लगभग समाप्त हो गई है। पहले उपराज्यपाल यह कह सकते थे कि वे यहां स्कूल बनाएंगे या अस्पताल के लिए धन देंगे। अब उन्हें हर प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजना होगा और अनुमति का इंतजार करना होगा। यह एक बड़ा झटका है और लद्दाख वित्तीय रूप से पूरी तरह विवश हो गया है। राज निवास का नाम बदलकर ‘लोक निवास’ करने के प्रस्ताव पर करगिली ने कहा कि इससे कुछ नहीं बदलेगा। उपराज्यपाल जनता के प्रतिनिधि नहीं हैं। वह केंद्र के प्रतिनिधि हैं। कोई जवाबदेही नहीं होगी। यह निर्णय दर्शाता है कि केंद्र को लद्दाख प्रशासन पर भरोसा नहीं है और यह लद्दाख की जनता के लिए बहुत गलत संदेश है।

रोजगार के आंकड़ों पर उन्होंने चिंता जताई कि जम्मू-कश्मीर में पांच लाख नौकरियां थीं जिनमें से दस प्रतिशत आरक्षण लद्दाख को मिलता था जो लगभग 50,000 अवसर थे। जब प्रतिस्पर्धा खुली थी तो लद्दाखी युवा 25,000 से 30,000 नौकरियां हासिल कर सकते थे लेकिन अब पूरा लद्दाख केवल 20,000 सरकारी नौकरियों तक सिमट कर रह गया है। लोगों को समझना होगा कि हमें कितनी नीचे ला दिया गया है।
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गृह मंत्रालय से बैठक की तारीख अभी तय नहीं
गृह मंत्रालय के साथ अगली बैठक की तारीख पर पूछे जाने पर करगिली ने बताया कि अभी तारीख तय नहीं है। उम्मीद है कि मंत्रालय जल्द बैठक तय करेगा। उन्होंने बताया कि लद्दाख के सभी प्रकार के विमुक्तिकरण पर एक विस्तृत ड्राफ्ट पहले ही जमा किया जा चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र मंत्रालय का निर्णय केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रदर्शन से असंतोष के कारण भी हो सकता है। लद्दाख के लिए जारी की गई धनराशि का सही उपयोग नहीं हो पाया और मंत्रालय जिस तरह का बुनियादी ढांचा देखना चाहता था, वह जमीन पर दिखाई नहीं देता। संभव है कि मंत्रालय प्रशासन के कामकाज से खुश नहीं है लेकिन इसमें लद्दाख की जनता की कोई गलती नहीं है। संवाद
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