लद्दाख में 428 खाद्य कारोबारियों के पास एफएसएसएआई लाइसेंस और 8,355 के पास एफएसएसएआई रजिस्ट्रेशन है। प्रशासन ने सभी रेस्टोरेंट, होटल, ढाबों और अन्य खाद्य कारोबारियों के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का पालन अनिवार्य किया है।
उपराज्यपाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ किया कि जनता की सेहत को खतरे में डालने वाले मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। हालांकि, कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के दायरे में होगी।
किन नियमों का करना होगा पालन?
खाद्य कारोबारियों को वैध एफएसएसएआई लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, सही तापमान और कोल्ड-चेन, स्वच्छ पानी, कचरा निस्तारण और कीट नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षित उपकरण, बर्तन और पैकेजिंग का इस्तेमाल करना होगा। कारोबारियों को खाद्य सामग्री विश्वसनीय और कानूनी स्रोतों से खरीदने, रिकॉर्ड रखने और लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
नियम तोड़े तो भारी जुर्माना
प्रशासन के अनुसार घटिया या मानक के अनुरूप न होने वाले खाद्य पदार्थ बेचने पर 5 लाख रुपये तक गलत लेबल वाले खाद्य पदार्थ पर 3 लाख रुपये तक और भ्रामक विज्ञापन या गलत जानकारी देने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिलावट रखने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बिना जरूरी लाइसेंस के खाद्य कारोबार करने पर भी 10 लाख रुपये तक की पेनल्टी का प्रावधान है।
वहीं, असुरक्षित भोजन बनाने, रखने, बेचने या वितरित करने के मामले में यदि किसी को चोट, गंभीर चोट या मौत होती है तो कानून के तहत जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग को अब पूरे लद्दाख में निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर असुरक्षित खाद्य सामग्री जब्त करने उसकी बिक्री पर रोक लगाने और लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई भी की जाएगी।