सरकार की दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
देलदान का मानना है कि सरकार उद्योगों को लेकर बहुत दावे करती है, लेकिन जमीन पर स्थितियां अलग हैं। नियमों और योजनाओं का पालन करना कठिन साबित होता है। अब तक लद्दाख एसेंशियल्स किसी भी सरकारी योजना से लाभ नहीं ले पाया है।
रोजगार और समाज से जुड़ाव
लद्दाख एसेंशियल्स में वर्तमान में 5 लोग स्थायी रूप से कार्यरत हैं, जबकि सी-बकथॉर्न की फसल के मौसम में यह संख्या 40–45 तक पहुंच जाती है। कंपनी स्थानीय किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों से बीज खरीदती है। जिन महिलाओं के समूह जूस, जैम और पल्प बनाते हैं, उनके पास बचा हुआ बीज कंपनी खरीद लेती है, जिससे महिलाओं को भी आर्थिक सहयोग मिलता है।
निवेश और बाजार
इस यूनिट की स्थापना के लिए लगभग 88 लाख रुपये का निवेश किया गया, जिसमें मशीनरी, पैकेजिंग, मार्केटिंग और परिवहन की लागत शामिल है। यह राशि जम्मू-कश्मीर बैंक से लिए गए ऋण से पूरी हुई, जिसमें 5 लाख रुपये की सब्सिडी मिली।
तेल की बिक्री दो तरीकों से होती है
ब्रांड ‘लद्दाख एसेंशियल्स’ के माध्यम से
थोक बाजार में 7–8 अन्य कंपनियों को, जिनके लिए न्यूनतम ऑर्डर एक लीटर रखा गया है।
भविष्य की योजना
वर्तमान में लद्दाख एसेंशियल्स का प्रदर्शन संतोषजनक है। पहले जहां लोगों में सी-बकथॉर्न के प्रति जानकारी सीमित थी, वहीं अब यह "वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट" योजना के तहत आ चुका है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। कंपनी भविष्य में उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है और इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र में भूमि आवंटन की प्रतीक्षा कर रही है।
लद्दाख के युवाओं के लिए संदेश
देलदान नामग्याल का मानना है कि बड़े स्तर पर कारोबार करना लद्दाख जैसे क्षेत्र में संभव नहीं है, लेकिन छोटे और टिकाऊ व्यवसाय युवाओं के लिए बेहतर विकल्प हैं। इससे नए अवसर पैदा होते हैं, बाजार में नए उत्पाद आते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ता है।