शुरुआती दौर में अपने परिवार, खासकर माता-पिता को मनाना सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय लद्दाख में नौकरी के अवसर उपलब्ध थे और उद्यमिता को जोखिम भरा माना जाता था। फिर भी सोनम अपने गांव में ही आजीविका बनाने के अपने संकल्प पर अडिग रहीं।
आने वाले समय को लेकर वह काफी महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रही हैं। पिछले वर्ष उत्पादन बाजार की मांग के अनुरूप नहीं हो पाया था, इसलिए इस वर्ष वह उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि करना चाहती हैं। इसके लिए वह दो और कर्मचारियों की नियुक्ति करने की योजना बना रही हैं।
सोनम टिकाऊ खेती के विकल्पों पर भी काम कर रही हैं। मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले भूसे से वह पहले छोटे स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट तैयार करती थीं, लेकिन इस वर्ष वह इसे बड़े पैमाने पर शुरू करने की योजना बना रही हैं ताकि यह एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन सके।
उनकी पहल केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष उन्होंने डिग्री कॉलेज के छात्रों को प्रशिक्षण दिया और मशरूम खेती से जुड़े कार्यशालाओं के लिए कई लोगों के फोन भी आए। इसी के चलते इस वर्ष वह एक दिवसीय हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित करने की योजना बना रही हैं, जिससे इच्छुक लोग खेती की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
मशरूम स्पॉन उत्पादन भी उनका एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है। वर्ष 2025 में सोनम ने जांस्कार और नुब्रा घाटियों के गांवों में लगभग 10 किलोग्राम मशरूम स्पॉन की आपूर्ति की थी। इस वर्ष उन्हें पहले से ही अधिक मात्रा के ऑर्डर मिल चुके हैं, इसलिए वह स्पॉन उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि खेती निरंतर जारी रह सके।
नवाचार, दृढ़ता और अपनी जड़ों से गहरे जुड़ाव के साथ सोनम आंगमो न केवल एक सफल उद्यम खड़ा कर रही हैं, बल्कि लद्दाख के दूरदराज गांवों में कृषि के पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।