सुरक्षा होगी कड़ी, हर टनल में हर 50 मीटर पर कैमरे
परियोजना में कार्य करते समय रेलवे इंजीनियरों के सामने सुरक्षा संबंधी चिंताएं थी। इसे दूर करने और मुख्य सुरंगों के साथ-साथ 67 किलोमीटर लंबी एस्केप सुरंगों को मजबूती देने के लिए, पारंपरिक सुरंग बनाने की विधि के बजाय हिमालयी सुरंग बनाने की तकनीक का नवाचार किया। सुरंगों में पूरी तरह से गिट्टी रहित पटरियां हैं, जैसा कि मेट्रो पटरियों पर इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें कोई जोड़ नहीं है।
यूएसबीआरएल के इस खंड में सबसे लंबी सुरंग यानी टी-50 12.77 किलोमीटर लंबी है। सुरंगों में हर 50 मीटर पर कैमरे लगाए गए हैं ताकि सुरक्षा और परिचालन डेटा पर नज़र रखी जा सके। ये कैमरे अत्याधुनिक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जुड़े हैं। रेलवे ने परियोजना स्थलों तक पहुंचने के लिए क्षेत्र में 215 किलोमीटर सड़के भी बनाई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिल रहा है। रेलवे ने इस परियोजना में कंपन रोधी भूकंपीय उपकरणों का उपयोग किया है।
कश्मीर में चलने वाली वंदे भारत देशभर में चलने वाली ट्रेन से होगी अलगरेलवे अब कटड़ा से श्रीनगर के बीच आठ कोच वाली जम्मू श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही शुरू होगी। इससे कश्मीर घाटी और जम्मू के बीच ट्रेन कनेक्टिविटी का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा। इससे यात्रा का समय मात्र तीन घंटे और दस मिनट होगा।
कश्मीर में चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस देशभर में चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस से अलग है। इसे विशेष रूप से अत्यधिक ठंड की स्थिति में सुचारू रूप से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, यानी -20 डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान पर। यात्रियों और लोको पाॅयलट के लिए ट्रेन में हीटिंग सिस्टम लगे हैं। ड्राइवर के केबिन में गर्म विंडशील्ड है जो इसे कोहरे या जमने से बचाता है। इसके अलावा, ट्रेन में पानी को जमने से रोकने के लिए प्लंबिंग और बायो-टॉयलेट में हीटिंग तत्व हैं।