विश्व प्रसिद्ध डल झील में शिकारों का अनुभव हर कोई करना चाहता है, लेकिन पर्यटन विभाग की ओर से जारी की गई नई किराया सूची से शिकारे मालिक संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में दाम बढ़ने चाहिए थे, लेकिन इसे कम कर दिया गया है, जोकि मंज़ूर नहीं है। किराए में पर्यटकों के अनुसार एकरूपता होनी चाहिए। साथ ही इस संबंध में विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है।
घाट नंबर 16 के शिकारा यूनियन के प्रेजिडेंट वली मोहम्मद ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से जारी नई सूची में किराया कम कर दिया गया है। नई सूची में एक घंटे का शिकारे का दाम 700 रुपए निर्धारित किया है, जबकि इससे पहले यह 770 रुपए था। विभाग की मनमानी नहीं चलेगी।
विभाग को सूची जारी करने से पहले शिकारा वालों से चर्चा करनी चाहिए थी। हमें यह सूची मंजूर नहीं है। किराये में कम से काम 25 फीसदी बढ़ोतरी होनी चाहिए। अगर शिकारा बंद भी करना पड़ेगा तो कर देंगे, लेकिन इस दाम पर नहीं चलेंगे।
एक अन्य शिकारा वाले अब्दुल रज्जाक ने कहा कि हम नई किराया सूची से सहमत नहीं हैं। महंगाई बढ़ रही है। इसलिए हमारा भी ख्याल रखा जाना चाहिए। सरकार के खिलाफ नहीं उनके साथ हैं। हम चाहते हैं कि किराये में बढ़ोतरी होनी चाहिए। पहले शिकारा एक लाख में बनता था लेकिन अब तीन लाख खर्च करने पड़ते हैं। अगर ऐसा ही रहा तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
पलवल (हरियाणा) निवासी पर्यटक हिमांशु ने बताया कि कश्मीर घूमने आए हैं। उन्होंने बताया कि 700 रुपए दाम निर्धारित किए हैं। भविष्य में किराया बढ़ाया भी जाता है तो गलत नहीं है। यहां के लोगों की कमाई का साधन ही यही है। एक अन्य पर्यटन अरुण गौतम ने बताया कि सरकार ने अगर कोई निर्देश निकाला है तो एकरूपता होना सही है। ऐसा होना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पर्यटकों और शिकारे वालों के बीच में रेट को लेकर विवाद रहेगा।
एक घंटे का दाम 770 है, जिसे सरकार द्वारा ही अनुमोदित किया गया है। नई रेट लिस्ट के लिए विभाग की ओर से आदेश जारी किया जाएगा। - राजा याकूब फारूक, निदेशक, कश्मीर पर्यटन विभाग।