अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अधिकारियों की ओर से साप्ताहिक रनवे बंदी के प्रस्ताव को वापस लेने और पूरे वर्ष निर्बाध उड़ान संचालन सुनिश्चित करने के निर्णय का स्वागत किया है। केसीसीआई के अध्यक्ष जाविद अहमद टेंगा ने इस फैसले को एक समयोचित और व्यावहारिक हस्तक्षेप बताया है जिसने जम्मू-कश्मीर के लिए गंभीर आर्थिक और सामाजिक दुष्परिणामों को टाल दिया है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन, व्यापार, बागवानी, स्वास्थ्य सेवा और व्यावसायिक क्षेत्रों के हितधारकों की ओर से जताई गई चिंताओं के बाद चैंबर ने तुरंत इस मामले को भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार के समक्ष उठाया था। चैंबर ने उनकी चिंताओं का त्वरित और सकारात्मक समाधान करने तथा घाटी के लिए निर्बाध हवाई संपर्क बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, और श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।
टेंगा ने कहा कि हर हफ्ते दो दिन के लिए उड़ान संचालन को निलंबित करने के प्रस्ताव ने पूरे कश्मीर में व्यापक आशंकाएं पैदा कर दी थीं। पर्यटन सीजन के चरम पर इस तरह की बंदी से पर्यटकों के आगमन, होटल बुकिंग, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, रेस्तरां, हस्तशिल्प, खुदरा व्यवसायों और उन हजारों परिवारों पर बहुत बुरा असर पड़ता जिनकी आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन पर निर्भर है।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रस्तावित व्यवधान से उन मरीजों को भी भारी कठिनाई होती जो विशेष चिकित्सा उपचार के लिए जम्मू-कश्मीर से बाहर यात्रा करते हैं, साथ ही छात्रों, कर्मचारियों, व्यावसायिक यात्रियों और आपातकालीन यात्रा आवश्यकताओं वाले परिवारों को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता। चैंबर ने रेखांकित किया कि श्रीनगर हवाई अड्डा कश्मीर की जीवन रेखा है और पर्यटन, व्यापार, बागवानी निर्यात, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास के लिए निर्बाध हवाई संपर्क अपरिहार्य है।