- जेल से रिहाई के बाद पहली बार कारगिल पहुंचे, जनसभा को किया संबोधित
- चेतावनी दी, यदि एकतरफा रवैया जारी रहा तो आंदोलन और तेज हो सकता है
संवाद न्यूज एजेंसी
कारगिल। जेल से रिहाई के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को कारगिल का पहला दौरा किया। इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते वांगचुक ने कहा, हमारी मांगें पूरी तरह जायज और सांविधानिक हैं। पिछले पांच-छह वर्षों से बातचीत के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है क्योंकि दूसरी तरफ से सख्त रुख अपनाया गया।
उन्होंने बीच का रास्ता अपनाने की बात करते हुए दोनों पक्षों से मजबूत रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने खुद और अन्य लोगों पर लगाए गए एजेंट होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग शिक्षा, पर्यावरण और सेना के सहयोग जैसे राष्ट्रीय कार्यों में योगदान देते रहे हैं उन्हें इस तरह निशाना क्यों बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, लद्दाखियों को इस तरह से पेश करना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि राष्ट्रीय हित के खिलाफ भी है। उन्होंने कारगिल युद्ध में कारगिल के लोगों की ओर से दिए गए बलिदान का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के आख्यान समाज में अविश्वास और दूरी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने ईमानदार व रचनात्मक बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया।
इससे पहले सोनम वांगचुक का कारगिल पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। एक मजबूत एकजुटता और राजनीतिक संकल्प का प्रदर्शन करते हुए लद्दाख भर के नेताओं ने सांविधानिक सुरक्षा और सार्थक संवाद की अपनी मांग को दोहराया। यह प्रतिबद्धता कारगिल के गांधी पार्क में आयोजित एक जनसभा में व्यक्त की गई। यहां क्षेत्र के शासन और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर किया गया।
हम न झुकेंगे और न ही डरेंगे : करबलई
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलई ने प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न समूहों के साथ चुनिंदा बातचीत और बिखरे हुए आख्यान के जरिए लद्दाखियों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। लद्दाख का नेतृत्व हमेशा संवाद के लिए तैयार रहा है लेकिन किसी भी एकतरफा फैसले को थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। करबलई ने कहा, हमने कभी भी बातचीत से पीछे कदम नहीं खींचा है लेकिन अगर संवाद का इस्तेमाल एजेंडा थोपने या लद्दाख को कमजोर करने के लिए किया गया तो हम न झुकेंगे और न ही डरेंगे।
लद्दाखियों को देशविरोधी बताने की कोशिश नुकसानदेह है
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाज को बांटने और चयनित प्रतिनिधित्व के जरिए नाममात्र का नेतृत्व तैयार करने की कोशिश की जा रही है। लेह, जंस्कार और कारगिल तीनों क्षेत्रों में जनभावना एकजुट है। करबलई ने हालिया गिरफ्तारियों और कार्यकर्ताओं पर लगाए गए आरोपों का भी जिक्र करते हुए कहा कि लद्दाखियों को देशविरोधी बताने की कोशिश नुकसानदेह है। उन्होंने कहा, सबसे बड़ा जख्म सिर्फ गिरफ्तारियां नहीं थीं, बल्कि लद्दाखियों को विदेशी एजेंट के रूप में पेश करने की कोशिश थी। ऐसे आरोपों को देश की जनता ने खारिज कर दिया। इस आंदोलन के केंद्र में छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग है जिन्हें नेता पूरी तरह सांविधानिक मानते हैं।
यह एकता हमारी ताकत है
नेताओं ने साफ कर दिया कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। करबलई ने संकेत दिया कि आगे की रणनीति सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर तय की जाएगी जिसमें विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल और अन्य आंदोलन जारी रह सकते हैं। उन्होंने कहा, हम चुप नहीं बैठेंगे। पूरा लद्दाख खड़ा होने के लिए तैयार है। सभा का एक प्रमुख विषय लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों लेह, कारगिल और जंस्कार की एकता पर जोर देना था। वांगचुक ने कहा कि इसी एकजुटता ने इस मुद्दे को पूरे लद्दाख की मांग बना दिया है। यह एकता हमारी ताकत है। इसके बिना हमारी आवाज उतनी मजबूत नहीं होती।
आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि संवाद आगे बढ़ेगा या आंदोलन तेज होगा
उन्होंने कहा कि धर्म या क्षेत्र के आधार पर विभाजन वास्तविक समस्या नहीं है बल्कि असली चुनौती मानसिकता को बदलने और साझा पहचान विकसित करने की है। नेताओं ने उम्मीद जताई कि हालिया प्रशासनिक कदम संवाद का रास्ता खोल सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एकतरफा रवैया जारी रहा तो आंदोलन और तेज हो सकता है। लद्दाख के नेता लगातार सांविधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि संवाद आगे बढ़ेगा या आंदोलन और तेज होगा।