तीन दिवसीय इस आयोजन में आधुनिक जल क्रीड़ाओं के साथ-साथ पारंपरिक कश्मीरी नाव प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया गया है। इसमें कैनोइंग, कयाकिंग, लंबी व छोटी दूरी की तैराकी, रोइंग और स्कलिंग, पारंपरिक डोंगा बोट रेस, फ्लैट-वॉटर कैनो, कयाक हेड-टू-हेड रेस, ड्रैगन बोट रेसिंग और शिकारा रेस जैसी स्पर्धाएं शामिल हैं। आयोजन को 20 श्रेणियों और 46 अलग-अलग प्रतियोगिताओं में बांटा गया है। प्रतिभागियों को अपनी तकनीकी दक्षता, खेल भावना और टीमवर्क प्रदर्शित करने का उत्कृष्ट मंच मिला है। समारोह को संबोधित करते हुए एडीजीपी आर्म्ड नीतीश कुमार ने युवाओं के सर्वांगीण विकास में खेलों के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने युवाओं से नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने और खेलों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। एडीजीपी ने जोर देकर कहा कि नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर के निर्माण के लिए पूरे समाज के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं, ताकि नई पीढ़ी एक स्वस्थ, अनुशासित और उत्पादक जीवनशैली अपना सके।
इस अवसर पर कश्मीर जोन के आईजीपी सुजीत कुमार, डीआईजी सेंट्रल कश्मीर रेंज राजीव ओमप्रकाश पांडे, डीआईजी आर्म्ड मकसूद-उल-जमां, डीआईजी आईआर मुबस्सिर लतीफी, एसएसपी श्रीनगर डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती, एसएसपी ट्रैफिक श्रीनगर बिस्मा काजी, स्टाफ ऑफिसर टू एडीजीपी आर्म्ड दलीप कुमार, विभिन्न जेकेएपी और आईआर बटालियनों के कमांडेंट, पुलिस अस्पताल श्रीनगर की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. इरफान गनी तथा जम्मू-कश्मीर कैनोइंग एंड कयाकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित पुलिस व नागरिक प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
जश्न-ए-डल खेल ही नहीं, कश्मीर की संस्कृति का उत्सव और नशे के खिलाफ सशक्त माध्यम
एडीजीपी: श्रीनगर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सशस्त्र पुलिस) नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि वार्षिक वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता जश्न-ए-डल केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि कश्मीर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव है। प्रसिद्ध डल झील के किनारे जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए एडीजीपी ने कहा कि यह आयोजन हर साल उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है। इसमें विभिन्न जल क्रीड़ा श्रेणियों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी भाग लेते हैं। उन्होंने इसे महज जश्न-ए-डल न मानकर जश्न-ए-कश्मीर करार दिया। उन्होंने कहा कि यह घाटी की जीवंत पहचान का शानदार प्रदर्शन है।
एडीजीपी ने बताया कि यह प्रतियोगिता आगामी तीन दिनों तक चलेगी। इसका समापन 15 अक्तूबर को पुरस्कार वितरण समारोह के साथ होगा। खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने खेल भावना को सर्वोपरि रखने और हार-जीत से परे रहकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का आह्वान किया। युवाओं में तनाव और चिंता की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि खेल एक ऐसा माध्यम है जो युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। उपराज्यपाल के नशामुक्त अभियानों के सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे खेल आयोजनों से नशे के प्रसार और तस्करी में खासी गिरावट आई है, क्योंकि खेल युवाओं को अवसाद और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर सही दिशा में प्रेरित करते हैं।