लेह। लद्दाख में सभी धार्मिक संगठनों के महिला विंग के प्रतिनिधियों ने राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग की है। उन्होंने विधायी प्रगति के बावजूद लगातार हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
इस दौरान नसरीन मरयम (अंजुमन इमामिया, महिला विंग अध्यक्ष) के साथ विभिन्न समुदायों की प्रतिनिधि मौजूद रहीं। इनमें आयशा मालू (अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम, महिला विंग अध्यक्ष), सुमिता दाना (क्रिश्चियन एसोसिएशन, महिला विंग अध्यक्ष) तथा लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन महिला विंग की उपाध्यक्ष शामिल थीं। नेताओं ने बताया कि महिलाओं के आरक्षण की मांग 2017 से लगातार ज्ञापनों और प्रयासों के माध्यम से उठाई जा रही है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के पारित होने का स्वागत करते हुए वक्ताओं ने चिंता जताई कि इसके क्रियान्वयन में 2029 की जनगणना या परिसीमन प्रक्रिया तक देरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी अनुचित है, क्योंकि यह मुद्दा दशकों से लंबित है। हालिया मतदाता आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं लगभग आधी मतदाता हैं, इसलिए उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि पंचायती और नगर निकायों में महिलाओं को पहले से 50 फीसदी आरक्षण प्राप्त है। ऐसे में उच्च राजनीतिक संस्थाओं में 33 फीसदी आरक्षण लागू करना आवश्यक और लंबे समय से लंबित है। उन्होंने भारत सरकार, सांसदों और लद्दाख के उपराज्यपाल से अपील की कि आगामी चुनावों में इस आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए।