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Srinagar News: कोल्ड स्टोरों में अभी भी 30 प्रतिशत सेब पड़ा, बागवानों के लिए साबित हुए गेम चेंजर

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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (सीए) कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स एक बार फिर सेब उत्पादकों के लिए अहम साबित हो रहे हैं। इनमें अभी भी करीब 30 प्रतिशत माल पड़ा है। बाजार की दरों में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को लगातार अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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किसानों ने बताया कि हालांकि पिछले महीने एक-दो सप्ताह के लिए सेब की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई थी लेकिन अब कीमतें फिर से बढ़ गई हैं। इससे उन्हें मुनाफा हो रहा है। हालांकि ये कीमतें अभी भी जनवरी और फरवरी में दर्ज की गई सबसे ज्यादा कीमतों से थोड़ी कम हैं।
बागवानी क्षेत्र के अनुमान के मुताबिक सेब का लगभग 20-30 प्रतिशत स्टॉक अभी भी कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स में रखा हुआ है। इससे किसानों को बाजार की मांग के हिसाब से अपनी फसल बेचने की आजादी मिल गई है।
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दक्षिण कश्मीर के एक किसान अब्दुल अहद मीर ने बताया कि पिछले महीने कुछ समय के लिए कीमतें गिर गई थीं। इससे किसानों में थोड़ी घबराहट फैल गई थी लेकिन अब कीमतें फिर से बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा हालांकि कीमतें सर्दियों के चरम के दौरान जितनी ज्यादा नहीं हैं फिर भी मुख्य कटाई के मौसम की तुलना में हमें अच्छे दाम मिल रहे हैं।
पुलवामा के अन्य किसान बशीर अहमद वागे ने बताया कि कटाई के समय सेब बेचने के बजाय उन्हें स्टोर करने का फैसला फायदेमंद साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्य सीजन के दौरान बाजार में शायद ही कोई मांग थी और कीमतें बहुत कम थीं। इसीलिए हममें से ज्यादातर लोगों ने कोल्ड स्टोरेज का विकल्प चुना। अब हम धीरे-धीरे सेब बेच रहे हैं और ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।
किसानों ने बताया कि स्टोरेज की उपलब्धता ने उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से बचने में मदद की है और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम की है। बारामुला के पट्टन के किसान मुश्ताक अहमद वाजा ने कहा कि पहले हमारे पास कटाई के तुरंत बाद फसल बेचने के अलावा कोई चारा नहीं होता था, जब बाजार फसलों से भरे होते थे। अब हम इंतजार कर सकते हैं और सही समय चुन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे कीमतों पर हमारा नियंत्रण बढ़ा है और हमारी मोलभाव करने की ताकत भी बेहतर हुई है।इस सुविधा को बढ़ाने की जरुरत है क्योंकि पैदावार ज्यादा है और स्टोरेज कम।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोल्ड स्टोरेज भंडारण प्रणाली अधिक आपूर्ति को रोककर और कई महीनों तक उपज का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करके बाजार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रणाली न केवल फलों की गुणवत्ता की रक्षा करती है बल्कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती है।
भंडारण किए गए सेबों से मिलने वाले बेहतर मुनाफे से व्यापक बागवानी अर्थव्यवस्था को भी लाभ हो रहा है। इससे उत्पादक उच्च गुणवत्ता वाले कीटनाशकों, पैकेजिंग और आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे बेहतर संसाधनों में पुनर्निवेश कर पा रहे हैं।
एक उत्पादक मेहराजुद्दीन ने कहा कि यदि गांवों के करीब अधिक इकाइयां स्थापित की जाएं तो इससे परिवहन लागत और कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी। कोल्ड स्टोरेज अब विलासिता नहीं बल्कि टिकाऊ सेब की खेती के लिए एक आवश्यकता है।
सेबों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भंडार में है और आने वाले हफ्तों में मांग में और सुधार होने की उम्मीद है इसलिए उत्पादक आशावादी हैं कि कीमतें मजबूत होंगी जिससे कश्मीर के फल उद्योग के लिए कोल्ड स्टोरेज की भूमिका एक गेमचेंजर के रूप में और भी पुष्ट होगी।
गौर हो कि जम्मू-कश्मीर में कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एक अधिकारी ने कहा कि नियंत्रित वातावरण (सीए) भंडारण की अनुमानित आवश्यकता 6 लाख मीट्रिक टन (फल फसलों के वार्षिक उत्पादन का 30 प्रतिशत) है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में 2.92 लाख मीट्रिक टन क्षमता है। विभाग अगले पांच वर्षों में नियंत्रित वातावरण भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है। केंद्र प्रायोजित योजना बागवानी के एकीकृत विकास मिशन (एमआईडीएच), जम्मू-कश्मीर में पर्याप्त धनराशि रखने के अलावा सरकार केंद्र शासित प्रदेश के पूंजीगत व्यय से अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।
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