श्रीनगर। बडगाम में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े फर्जी योग्यता सर्टिफिकेट मामले में एक अहम आदेश आया है। श्रीनगर की भ्रष्टाचार निरोधक (एसीबी) अदालत के अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश ने अब्दुल लतीफ खान और गुलाम हसन हकीम के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। वहीं इस मामले में आरोपियों अब्दुल अजीज मल्ला, गुलाम नबी शाह, रविंदर कुमार रैना, हकीम नूर मोहम्मद और गुलाम कादिर मिसगर को बरी कर दिया गया है।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि अब्दुल लतीफ खान ने वर्ष 2000 में बडगाम के हार्ड पांजू शिक्षा क्षेत्र में ''''रहबर-ए-तालीम'''' शिक्षक के तौर पर नियुक्ति पाने के लिए एक फर्जी और जाली बारहवीं कक्षा का अंक-पत्र पेश किया था। बाद में अपनी सेवाओं को नियमित करवाने में भी सफल रहा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि खान संबंधित समय पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं था। जिस अंक-पत्र के आधार पर उसने नियुक्ति पाई थी, वह बाद में स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किए गए सत्यापन के दौरान फर्जी पाया गया।
अदालत ने हार्ड पांजू के तत्कालीन जोनल शिक्षा अधिकारी (जेडईओ) गुलाम हसन हकीम के खिलाफ भी प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाए। अदालत ने टिप्पणी की कि सेवाओं को नियमित करने वाले आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि आदेश को लागू करने से पहले मूल शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद, कथित तौर पर इन निर्देशों का पालन किए बिना ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस चरण पर, लाभार्थी और संबंधित जेडईओ के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सामग्री (साक्ष्य) मौजूद है।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अब्दुल अजीज मल्ला, गुलाम नबी शाह, रविंदर कुमार रैना, हकीम नूर मोहम्मद और गुलाम कादिर मिसगर के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि इन आरोपियों ने केवल सामान्य प्रक्रिया के तहत वेतन जारी किया था या संबंधित फाइल पर कार्रवाई की थी। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो सके कि लाभार्थी की शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन करना उनकी जिम्मेदारी थी।