हर रोज पहुंच रहे औसतन दो हजार पर्यटक, लोगों ने की सुविधाएं बढ़ाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुपवाड़ा। केरन जम्मू-कश्मीर के सबसे तेजी से बढ़ते टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक बन गया है। कभी अपनी रणनीतिक बॉर्डर लोकेशन के लिए पहचाना जाने वाला यह खूबसूरत गांव आज शांति, प्राकृतिक सुंदरता और मजबूती का प्रतीक बन गया है। यहां हजारों सैलानी इसके साफ-सुथरे नजारों, किशनगंगा नदी के साफ पानी और बॉर्डर टूरिज्म के अनोखे आकर्षण का अनुभव करने आते हैं।
हर दिन 2000 से ज्यादा टूरिस्ट के आने से केरन में सैलानियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश भर से परिवार, प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर, ट्रेकर्स और एडवेंचर के शौकीन लोग यहां आ रहे हैं। इससे यह नॉर्थ कश्मीर के सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन में से एक बन गया है। टूरिज्म में यह शानदार बढ़ोतरी न सिर्फ केरन की अद्भुत सुंदरता को दिखाती है, बल्कि इस इलाके की सुरक्षा और मेहमान नवाजी में टूरिस्ट के भरोसे को भी दर्शाती है।
अधिकारियों ने बताया कि केरन में टूरिज्म का फिर से शुरू होना और तेजी से बढ़ना भारतीय सेना और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन की लगातार कोशिशों का नतीजा है। इनके आपसी तालमेल ने कभी दूर-दराज के इस बॉर्डर वाले गांव को एक सुरक्षित, आसानी से पहुंचने लायक और स्वागत करने वाले डेस्टिनेशन में बदल दिया है। बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत सुरक्षा और टूरिस्ट के लिए अच्छे मैनेजमेंट की वजह से पर्यटकों ने इसकी काफी तारीफ की है।
हालांकि, इस उत्साहजनक बढ़ोतरी के साथ कुछ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। टूरिस्ट की बढ़ती संख्या का मौजूदा पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी दबाव पड़ा है। इसलिए अधिकारियों के लिए जरूरी है कि वे बढ़ती मांग के हिसाब से सुविधाओं का विस्तार करें। अगर समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए तो ये सुधार न सिर्फ टूरिस्ट के अनुभव को बेहतर बनाएंगे, बल्कि केरन को बॉर्डर वाले इलाकों में सस्टेनेबल टूरिज्म के लिए एक मॉडल के तौर पर भी स्थापित करेंगे।
बढ़ती टूरिस्ट आबादी की उम्मीदों को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ), सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और दूसरी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बहुत जरूरी है। ट्रैफिक कंट्रोल, भीड़ को संभालने, टूरिस्ट की मदद करने, इमरजेंसी में तुरंत कार्रवाई करने और लोगों को सही जानकारी देने में उनकी सक्रिय भागीदारी से टूरिस्ट की आवाजाही आसान होगी और सुरक्षा की भावना और मजबूत होगी, जो केरन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन गई है।
इसके साथ ही, सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की भी बहुत जरूरत है और ज्यादा पब्लिक टॉयलेट और मॉडर्न वॉशरूम, साफ पीने के पानी की सुविधा, यात्रियों के लिए वेटिंग शेल्टर, सही पार्किंग एरिया, कचरा हटाने का सिस्टम, रात में स्ट्रीट लाइटिंग, फर्स्ट-एड और मेडिकल मदद केंद्र, बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी, टूरिस्ट हेल्प डेस्क, जानकारी और रजिस्ट्रेशन काउंटर, दिशा बताने वाले साइनबोर्ड, बैठने की जगह और सुंदर बनाए गए पब्लिक एरिया अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गए हैं। ये सुविधाएं काफी हद तक सुविधाएं बढ़ाएंगी, भीड़ कम करेंगी और टूरिस्ट को उस जगह को घूमने-फिरने में ज्यादा समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।
आने वाले टूरिस्ट की संख्या बढ़ने से हॉस्पिटिलिटी, ट्रांसपोर्ट, हैंडीक्राफ्ट, स्थानीय खान-पान, होमस्टे, गाइडिंग सर्विस और छोटे व्यवसायों में रोजगार पैदा होंगे, जिससे टिकाऊ आजीविका मिलेगी और इलाके की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। एक फल-फूल रहा टूरिज्म सेक्टर समावेशी विकास के लिए एक उत्प्रेरक बन सकता है और साथ ही सीमावर्ती समुदायों के स्नेह, संस्कृति और परंपराओं को भी दिखा सकता है। केरन आज अपनी टूरिज्म यात्रा के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। इंफ्रास्ट्रक्चर में समय पर निवेश, अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और टिकाऊ विकास के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ इस खूबसूरत सीमावर्ती डेस्टिनेशन में भारत की बेहतरीन टूरिज्म सक्सेस स्टोरीज में से एक के रूप में उभरने की क्षमता है।