पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में कृषि आधारित उद्यमिता की एक शानदार मिसाल सामने आई है। पांपोर के मीज इलाके के रहने वाले एक युवा किसान रफीक रसूल ने सरकारी सहायता का लाभ उठाकर 41 लाख रुपये का एक सफल कमर्शियल पॉलीहाउस फार्मिंग वेंचर स्थापित किया है। यह पहल साबित करती है कि कश्मीर में संरक्षित खेती आय और रोजगार का एक बड़ा जरिया बन सकती है।
रफीक रसूल ने होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के तहत करीब 41 लाख रुपये की कुल लागत से दो हाई-टेक पॉलीहाउस स्थापित किए हैं। इस परियोजना में उन्हें सरकार की ओर से 95 प्रतिशत की भारी सब्सिडी सहायता प्राप्त हुई, जिससे वे साल भर बेमौसमी और उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों के उत्पादन के लिए आधुनिक फार्मिंग यूनिट तैयार करने में सफल रहे।
पारंपरिक खेती के विपरीत, जहां किसान पूरी तरह मौसम और ऋतु चक्र पर निर्भर रहते हैं, पॉलीहाउस नियंत्रित तापमान और अनुकूल परिस्थितियों में निरंतर उत्पादन सुनिश्चित करता है। इस आधुनिक तकनीक के जरिए रफीक ने पारंपरिक फसलों से हटकर हाइब्रिड और विदेशी किस्मों की खेती शुरू की है। वर्तमान में वे खीरे और अन्य मौसमी सब्जियों के साथ-साथ कद्दू की लगभग आठ उन्नत किस्मों की खेती कर रहे हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है और उन्हें नियमित मुनाफा मिल रहा है।
यह उद्यम न केवल रफीक के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बना है, बल्कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर करीब 10 लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया है। अपनी सफलता पर बात करते हुए रफीक रसूल ने कहा कि युवाओं को सिर्फ सरकारी नौकरियों के इंतजार में समय गंवाने के बजाय सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही योजना, तकनीक और संस्थागत सहयोग के साथ आधुनिक खेती को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार की परियोजनाएं नई पीढ़ी के किसानों को तकनीक आधारित खेती अपनाने और कृषि-उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक अहम कदम हैं। विभाग एचएडीपी के माध्यम से युवाओं को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक और नवीन कृषि गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें।