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Srinagar News: फर्ज निभाते 30 साल पहले जिस चौखट से पिता की अर्थी उठी, उसी दहलीज से बलिदानी बेटे का निकला जनाजा

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बलिदानी पुलिसकर्मी का राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए खाक
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बीरवाह में देर रात पढ़ा गया जनाजा, पैतृक गांव में हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की पार्थिव देह को किया सुपर्द-ए खाक
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। बडगाम जिले में बीरवाह के लोलीपोरा गांव के रहने वाले कुरैशी परिवार का साया तीन दशक पहले उस वक्त उठ गया था जब जम्मू-कश्मीर पुलिस में हेड कांस्टेबल गुलाम मोहिउद्दीन कुरैशी ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे। अब 30 साल बाद उसी चौखट पर दर्द ने फिर दस्तक दी, जब आतंकियों ने उनके हेड कांस्टेबल बेटे आशिक हुसैन कुरैशी की जान ले ली। इस हमले ने परिवार के पीछे आंसुओं से भीगी एक और मासूम पीढ़ी को छोड़ दिया है।
आशिक हुसैन कुरैशी (45) को पिता के निधन के बाद अनुकंपा के आधार पर पुलिस की नौकरी मिली थी। बुधवार दोपहर अनंतनाग जिले के लाल चौक के पास जब वह देश की सुरक्षा में तैनात थे। तभी आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले से महज एक घंटे पहले ही आशिक हुसैन ने फोन पर घरवालों से बात की थी।
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लोलीपोरा गांव के लोगों के लिए आशिक सिर्फ खाकी वर्दी वाले सिपाही नहीं थे। वह उस बेटे की तरह थे जिसने पिता की शहादत और विरासत को गर्व से संभाला। वह बूढ़ी विधवा मां का आखिरी सहारा थे, पूरे परिवार का रखवाला थे। बुधवार देर शाम जब बलिदानी का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा पूरे लोलीपोरा की खामोशी चीखों और सिसकियों में बदल गई। बिलखती महिलाएं आंसुओं को रोक नहीं पा रही थीं।
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बलिदानी को आखिरी सलाम के लिए उमड़ा जनसैलाब
अपने लाल के आखिरी दीदार के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी तादाद में लोग खड़े थे। बलिदानी को अंतिम विदाई देने के लिए बीरवाह और आसपास के इलाकों से जनसैलाब उमड़ पड़ा। जम्मू कश्मीर पुलिस के सेंट्रल कश्मीर रेंज (सीकेआर) के डीआईजी राजीव ओमप्रकाश पांडे, बड़गाम के एसएसपी हरिप्रसाद केके, बड़गाम के डीसी अथर आमिर और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने गांव पहुंचकर बलिदानी के जनाजे को कंधा देकर शोकाकुल परिवार को ढांढ़स बंधाया। देर रात पैतृक कब्रिस्तान में नम आंखों से आशिक हुसैन की पार्थिव देह को सुपुर्द-ए खाक किया गया।बलिदानी अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, एक बेटी, बूढ़ी मां, एक भाई और तीन शादीशुदा बहनों को बिलखता छोड़ गए हैं।
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