मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एलजी प्रशासन पर किया बड़ा हमला
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को श्रीनगर के पुराने शहर में स्थित मारे गए लोगों के कब्रिस्तान तक जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक करने पर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल (एलजी) प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) मुख्यालय नवाए सुबह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जिन्होंने आज हमें कब्रिस्तान पर जाने से रोका है, वे कुछ दिनों के मेहमान हैं। वे आज यहां हैं, कल नहीं होंगे, लेकिन ये कब्रें कल भी यहीं थीं, आज भी हैं और हमेशा यहीं रहेंगी।
13 जुलाई 1931 को मारे गए कश्मीरी लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला सहित पार्टी के तमाम शीर्ष नेता मुख्यालय पर जुटे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को आज भले ही रोक दिया गया हो, लेकिन वे दोबारा वहां जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि आज नहीं तो कल, हम वहां फिर जाएंगे। फूल चढ़ाएंगे और मारे गए लोगों के लिए फातिहा पढ़ेंगे। गौरतलब है कि साल 2020 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने इस दिन को राजपत्रित अवकाश की सूची से हटा दिया था।
प्रशासन के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मेरी इच्छा है कि कब्रिस्तान को बंद करने का फैसला लेने वालों ने अगर जम्मू-कश्मीर का इतिहास दो मिनट के लिए भी पढ़ा होता तो वे समझ जाते कि इस फैसले से उन्होंने उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान किया है, जिन्होंने आजादी से पहले अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि उस समय कश्मीर एक रियासत जरूर था, लेकिन यहां ब्रिटिश हुकूमत का दबदबा था और महाराजा ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली थी।
मुख्यमंत्री ने महाराजा की ओर से ब्रिटिश अधीनता स्वीकार करने का सबूत देते हुए कहा कि श्रीनगर और जम्मू की रेसिडेंसी रोड इसका जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने बताया कि पार्टी मुख्यालय से कुछ सौ मीटर की दूरी पर जो आज एम्पोरियम है, वह कभी ब्रिटिश रेजिडेंट का घर हुआ करता था और आज जम्मू में जो मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास है, वह कभी रेसिडेंसी बिल्डिंग थी। जम्मू और श्रीनगर की इन दोनों सड़कों का नाम रेसिडेंसी रोड इसलिए पड़ा क्योंकि ये ब्रिटिश रेजिडेंट के आवास की तरफ जाती थीं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह लड़ाई धर्म की नहीं थी बल्कि सिद्धांतों और लोकतंत्र की लड़ाई थी और सबसे बढ़कर यह अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग थी। जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या कब्रिस्तान जाने से रोके जाने पर उनकी साख को धक्का लगा है, तो उन्होंने कहा कि इससे उनकी नहीं बल्कि घाटी में सब कुछ सामान्य होने का दावा करने वालों की साख खराब हुई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति को लेकर किए जा रहे सभी दावों की पोल खोलता है।
सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ऐसा कोई समय याद नहीं है जब अमरनाथ यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को आम यातायात के लिए बंद करना पड़ा हो, लेकिन इस साल यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाईवे बंद किया जा रहा है, जो मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़े करता है।