श्रीनगर। घाटी में बुधवार को ईद-उल-अजहा के पवित्र त्यौहार की शुरुआत हुई। ऐसे में कश्मीर के स्वास्थ्य और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस त्योहार के दौरान जानवरों के कचरे (खाल, सिर, पैर, आदि) के गलत तरीके से निपटारे पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि साफ-सफाई से जुड़ी लापरवाही सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है। पानी के स्रोतों को दूषित कर सकती है और नाजुक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती है।
उन्होंने अपील की है कि इस धार्मिक अवसर को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से मनाया जाए। इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन, नगर निगम की समन्वित कार्रवाई और लोगों में अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. तारिक अहमद ने कहा कि ईद-उल-अजहा एक पवित्र अवसर है। यह प्रदूषण और बीमारियों का स्रोत बनने के बजाय आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाने वाला होना चाहिए। कुर्बानी साफ-सफाई के साथ की जानी चाहिए। खून, अपशिष्ट और खाल सहित सभी उप-उत्पादों का निपटारा वैज्ञानिक और स्वच्छ तरीके से किया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में और भी जरूरी हो जाता है, जब संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. तारिक ने चेतावनी दी कि जानवरों के कचरे का इधर-उधर बिखरा होना और खुले में फेंकना मक्खियों, मच्छरों और आवारा जानवरों के पनपने के लिए आदर्श माहौल बनाता है। इससे पानी, भोजन और कीटाणुओं से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जब जानवरों के कचरे को नालियों, नदियों या खुले स्थानों में फेंक दिया जाता है तो यह सतह के पानी और भूजल को दूषित कर देता है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को बड़ा खतरा पैदा होता है। ऐसी लापरवाहियों के कारण पेट से जुड़े संक्रमण और अन्य संक्रामक रोग फैल सकते हैं।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कुर्बानी वाली जगहों पर साफ-सफाई बनाए रखें और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए कीटाणुनाशकों का उपयोग करें। नगर निगम के अधिकारी कचरा इकट्ठा करने की व्यवस्था कर रहे हैं लेकिन नागरिकों को भी सहयोग करना चाहिए और दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
श्रीनगर में पर्यावरण विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर ने कहा कि जानवरों के कचरे को बिना सोचे-समझे कहीं भी फेंकने से प्रदूषण, बदबू और संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ईद-उल-अजहा के दौरान कचरा प्रबंधन के सख्त नियमों को लागू करने की जरूरत है। नगर समितियों और नागरिक निकायों को कचरा फेंकने के लिए तय जगहें बनानी चाहिए और कचरा इकट्ठा करने के तरीकों को मजबूत करना चाहिए ताकि रिहायशी इलाकों में कचरा जमा न हो। उन्होंने जागरूकता अभियानों और लोगों की भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।
कोट
लोगों को सलाह है कि वे जानवरों के कचरे को नदियों, नालों या नालियों में न फेंकें। कचरे को ठीक से खोदे गए गड्ढों में दबा दें या फिर अपने गांवों और इलाकों में तय जगहों पर इकट्ठा करें ताकि उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा सके।
-फिरदौस अहमद, कार्यकारी अभियंता, जल शक्ति विभाग