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Srinagar News: पैगंबर मोहम्मद की नेक शिक्षाओं और अनुकरणीय जीवन का अनुसरण करने का आह्वान किया गया

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श्रीनगर। ईद मिलाद उन नबी के मौके पर बुधवार को घाटी में खानकाहों पर जायरीनाें का हुजूम जुटा। जगह-जगह जुलूस ए मुहम्मदी निकाले गए और मजलिसों का आयोजन किया गया। श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में पैगंबर की पवित्र निशानी की जियारत कराई गई। वहीं कारवाने इस्लामी इंटरनेशनल की ओर से भी कार्यक्रम किए गए। इस दौरान पैगंबर मोहम्मद की नेक शिक्षाओं और अनुकरणीय जीवन का अनुसरण करने का आह्वान किया गया।
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धार्मिक और सामाजिक संगठन कारवाने इस्लामी इंटरनेशनल ने मिलाद-उन-नबी के मौके पर पूरे इलाके में सैकड़ों सभाएं और कार्यक्रम आयोजित किए। मंगलवार रात शब-ए-मिलाद-उन-नबी के मौके पर मुख्य संस्थान, जामिया कादरिया, मुर्शिद नगर, त्रिगाम शादीपोरा में मिलाद-उन-नबी कॉन्फ्रेंस बहुत उत्साह, धार्मिक जोश और श्रद्धा के साथ मनाई गई। दूर-दूर से सैकड़ों लोग इस सभा में शामिल हुए और रात के मुबारक पलों को अल्लाह के रसूल के प्रति अपना प्यार और अकीदत जाहिर करते हुए उनकी याद और इबादत में बिताया। साथ ही उन्होंने जाने-माने और मशहूर इस्लामिक विद्वानों की तकरीर भी सुनी।
कारवाने इस्लामी के अमीर अल्लामा डॉ. गुलाम रसूल हामी ने बताया कि इस इलाके के कई विद्वानों के अलावा, देश के अलग-अलग हिस्सों से भी कई मशहूर और बड़े विद्वान इस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। इनमें अल्लामा मुहम्मद अहमद नक्शबंदी, अल्लामा अहमद महमूद अजहरी और अल्लामा कमाल मुस्तफा अजहरी प्रमुख थे, जिन्होंने मिलाद-उन-नबी की बरकतों और खूबियों के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम के दौरान जामिया कादरिया से ग्रेजुएट हुए लगभग 45 विद्वानों और पवित्र क़ुरान के हाफिजों को पारंपरिक दस्तारबंदी (पगड़ी पहनाने की रस्म) समारोह के जरिए सम्मानित किया गया।
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ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर गांदरबल में जमीयत अहले सुन्नत द्वारा मिरानी जामिया मस्जिद से मरकजी जामिया मस्जिद, बिहामा तक एक धार्मिक रैली का आयोजन किया गया। रैली में सैकड़ों स्थानीय लोगों, छात्रों और इस्लामी विद्वानों ने भाग लिया और पैगंबर मोहम्मद के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया। रैली के दौरान इस्लामी विद्वानों ने पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं और सुन्नत का पालन करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से नशे और अन्य हानिकारक गतिविधियों से दूर रहने और कुरान द्वारा दिखाए गए नेक मार्ग को अपनाने का आग्रह किया। विद्वानों ने लोगों से समाज में शांति, भाईचारा, नैतिकता और इस्लामी मूल्यों को बढ़ावा देने और पैगंबर मोहम्मद की नेक शिक्षाओं और अनुकरणीय जीवन का अनुसरण करने का भी आह्वान किया।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही किया मार्ग परिवर्तन

ईद मिलाद उन नबी के मौके पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही मार्ग परिवर्तन भी किया गया था। हजरतबल सहित खानकाहों और मस्जिदों में शबदारी और इबादत के चलते रात से ही मार्ग परिवर्तन किया गया था। उत्तरी कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर शालतेंग पहुंचने के बाद हजरतबल दरगाह तक पहुंचने के लिए शालतेंग - परिमपोरा - कमरवारी - सीमेंट ब्रिज - नूरबाग - सेकिदाफर - ईदगाह - अली मस्जिद - सागरपोरा - हवाल - आलमगरी बाजार - मिल स्टॉप - मौलवी स्टॉप (लाल बाजार) - बोतशाह मोहल्ला - कानितर - यूनिवर्सिटी पार्किंग (सादरबल साइड) से मार्ग दिया गया। दक्षिणी कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर पंथा चौक पहुंचने के बाद हजरतबल दरगाह तक आने के लिए पंथाचौक - स्टोन क्वारी (अठवाजन) - बटवारा - सोनवार बाजार - राम मुंशी बाग - गुपकर - ग्रैंड पैलेस - जेठियार घाट - निशात - फोरशोर रोड - हबक क्रॉसिंग - यूनिवर्सिटी पार्किंग (नसीमबाग साइड) मार्ग दिया गया। इसके अलावा अन्य मार्गों पर भी व्यवस्थाएं की गईं व पार्किंग का इंतजाम किया गया।
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