कहा- राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पहले विधानसभा में लाएं, न कि दिल्ली की सड़कों पर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद लोन ने शुक्रवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला किया। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आह्वान के समय और उसके असली मकसद दोनों पर सवाल उठाए।
लोन ने अपनी बात यह कहते हुए शुरू की कि अब्दुल्ला परिवार में शोक के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस एक दिन टाल दी गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का रुख नहीं बदला है। जम्मू-कश्मीर का 5 अगस्त 2019 से पहले का दर्जा, आर्टिकल 370, आर्टिकल 35ए और पूर्ण राज्य का दर्जा सबसे अहम है और इनमें भी आर्टिकल 370 सबसे महत्वपूर्ण है।
लोन की मुख्य दलील यह थी कि लोकतंत्र में बड़े राजनीतिक फैसलों के लिए आम सहमति की जरूरत होती है, न कि सड़कों पर उतरने के एकतरफा आह्वान की। उन्होंने याद दिलाया कि अगस्त 2019 की शुरुआत में फारूक और उमर अब्दुल्ला ने दूसरी पार्टियों को भरोसे में लिए बिना दिल्ली का दौरा किया था। अगले ही दिन प्रधानमंत्री के साथ उनकी तस्वीर सामने आई और भरोसा दिलाया गया कि कुछ नहीं बदलने वाला है लेकिन 48 घंटे के भीतर ही आर्टिकल 370 हटाकर उस भरोसे को तोड़ दिया गया।
मौजूदा हालात पर बात करते हुए लोन ने कहा कि भले ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अपनी पुरानी ताकत खो दी हो, लेकिन उसका प्रतिनिधित्व करने वाला स्वरूप नहीं खोया है। यह अब भी लोगों की संवैधानिक आवाज बनी हुई है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि यह बात स्वीकार करने लायक नहीं है कि लगभग दो साल में राज्य का दर्जा बहाल करने का कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ और खुद उनके द्वारा ऐसा प्रस्ताव लाने की कोशिशों को स्पीकर ने इस आधार पर रोक दिया कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
लोन की मुख्य मांग यह थी कि सरकार विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाए। राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पास करे और फिर बिना किसी दिखावे के सभी पार्टियों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष के नेता से मिलने भेजे। उन्होंने कहा कि अगर यह तरीका काम न करे, तभी जंतर-मंतर पर जाने के बारे में सोचा जाना चाहिए और उस स्थिति में उनकी पार्टी भी इसमें शामिल होगी।