गांदरबल। तुलमुल्ला में सालाना खीर भवानी मेले की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। इस दौरान स्थानीय लोगों, समुदाय के नेताओं और श्रद्धालुओं ने सांप्रदायिक सद्भाव, भाईचारे और कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में वापसी का मजबूत संदेश दिया है। 21 और 22 जून को होने वाले इस सालाना मेले के लिए जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों से श्रद्धालु पवित्र खीर भवानी मंदिर पहुंचने लगे हैं। मंदिर परिसर का माहौल आस्था, पुरानी यादों और मिलन के अनोखे संगम को दर्शाता है।
स्थानीय निवासी बिलाल भट्ट ने कहा कि इस इलाके के मुसलमानों ने हमेशा कश्मीरी पंडितों का खुले दिल से स्वागत किया है और वे घाटी में उनकी स्थायी वापसी की उम्मीद करते रहते हैं। उन्होंने कहा, हमारे घर और दिल हमारे कश्मीरी पंडित भाई-बहनों के लिए हमेशा खुले हैं। हम चाहते हैं कि वे कश्मीर में अपने घरों को लौटें। जब भी वे आते हैं, हम उनसे प्यार से मिलते हैं, उन्हें गले लगाते हैं और पुरानी यादें साझा करते हैं। उनकी वापसी से सभी को खुशी मिलती है।
भट्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह सालाना मेला सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है, जहां स्थानीय मुसलमान और बाहर से आने वाले पंडित एक साथ आते हैं और पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्तों को और मजबूत करते हैं।
निवासियों ने बताया कि इस साल प्रशासन ने बेहतर सुविधाएं और इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों के लिए नया यात्री निवास, बेहतर सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, पीने का पानी, स्वच्छता सेवाएं और ठहरने की व्यवस्था की गई है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, जिला प्रशासन, पुलिस और सभी संबंधित विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। किसी भी सुविधा की कोई कमी नहीं है। यह मेला भाईचारे, एकता और शांति का जीता-जागता उदाहरण है।
कई स्थानीय लोगों ने बाहर से आए श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी की है जो मेहमाननवाज़ी और पंडित समुदाय का स्वागत करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्य कार्यक्रम से पहले मंदिर पहुंचे श्रद्धालु वीरजी राणा ने इंतजामों और स्थानीय लोगों द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत की तारीफ की।
उन्होंने कहा, प्रशासन ने बहुत अच्छा काम किया है। मंदिर को बहुत खूबसूरती से सजाया गया है और सभी सुविधाएं मौजूद हैं। स्थानीय लोग बहुत स्वागत करने वाले हैं और उन्होंने बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए कमरों का इंतज़ाम भी किया है।
इस बीच, डॉ. पीएस धर्म ट्रस्ट के प्रेसिडेंट पठानिया ने इस साल रिकॉर्ड संख्या में लोगों के आने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, पिछले साल लगभग 15,000 श्रद्धालु मंदिर आए थे। इस साल यह संख्या काफी ज्यादा होने की उम्मीद है। ट्रस्ट ने रहने की जगह, पानी, बिजली, साफ़-सफ़ाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए पूरे इंतजाम किए हैं।
जम्मू, उधमपुर, कठुआ, राजोरी, दिल्ली और दूसरे इलाकों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। खीर भवानी मेला एक बार फिर कश्मीर की मिली-जुली सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे की एक मजबूत मिसाल बना हुआ है।