श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर लोक भवन में शनिवार को पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के मौके पर एक सांस्कृतिक शाम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, छात्र और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे पश्चिम बंगाल के लोग शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मौके पर पश्चिम बंगाल के लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों की खुशी, भलाई और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
उपराज्यपाल ने कहा, पश्चिम बंगाल भारतीय संस्कृति का एक जीवंत रूप है। इसकी लोक कलाएं, संगीत परंपराएं और त्योहार सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं। साहित्य, कला, संगीत और विज्ञान में पश्चिम बंगाल के बेजोड़ योगदान ने समाज को एक नया नजरिया दिया है। यह क्षेत्र न केवल राजनीतिक जागृति का केंद्र रहा है, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का भी एक प्रमुख केंद्र रहा है।
उपराज्यपाल ने पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों और महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। उपराज्यपाल ने कहा, भारत की आज़ादी की लड़ाई और राष्ट्र-निर्माण में पश्चिम बंगाल का योगदान सचमुच शानदार रहा है। यह धरती हमेशा से देशभक्ति, सामाजिक जागृति और वैचारिक नेतृत्व का केंद्र रही है।
यह महर्षि श्री अरबिंदो, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, स्वामी प्रभुपाद, खुदीराम बोस, शरत चंद्र चट्टोपाध्याय और महाश्वेता देवी जैसी महान हस्तियों और ऐतिहासिक शख्सियतों का घर रहा है, जिन्होंने हमारी आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना को एक नई दिशा दी। यह राज्य विकास और तरक्की की नई ऊंचाइयों को छूता रहे।
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय के आंदोलन का नेतृत्व करने में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अहम भूमिका को याद किया। उपराज्यपाल ने कहा, डॉ. मुखर्जी ने अपने ऐतिहासिक संघर्ष से राष्ट्रीय एकता की जो नींव मजबूत की थी, उसी के आधार पर आज जम्मू-कश्मीर विकास और समृद्धि के नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मैं उनके अटूट साहस, देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण को सलाम करता हूं। उपराज्यपाल ने युवाओं से ऐसी महान हस्तियों से प्रेरणा लेने और एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।