श्रीनगर। विश्व पर्यावरण दिवस पर नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि विकास और आर्थिक तरक्की के साथ-साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं के पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए डॉ. फारूक ने कहा कि बेतहाशा पेड़ों की कटाई, प्रदूषण, प्राकृतिक आवासों पर कब्जा और संसाधनों का अंधाधुंध दोहन जम्मू-कश्मीर के नाज़ुक इकोसिस्टम के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह इलाका पहले से ही वैश्विक स्तर पर पर्यावरण की अनदेखी के नतीजे भुगत रहा है। इसमें जल स्रोतों का सिकुड़ना, मौसम का अनिश्चित मिजाज, जैव विविधता का नुकसान और कई पेड़-पौधों व जानवरों की प्रजातियों का धीरे-धीरे खत्म होना शामिल है।
डॉ. फारूक ने कहा, तरक्की के लिए विकास जरूरी है लेकिन यह हमारे पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। हमें अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करना होगा और टिकाऊ विकास का ऐसा मॉडल अपनाना होगा जो लोगों की जरूरतों को पूरा करते हुए प्रकृति की भी रक्षा करे।
जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने ज़ोर दिया कि इसके जंगलों, झीलों, नदियों और पहाड़ों को बचाना न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी है, बल्कि यह इलाके की सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बहुत जरूरी है।
डॉ. फारूक ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे जागरूकता अभियानों, सामुदायिक पहलों, पौधरोपण कार्यक्रमों और ज़िम्मेदार जीवनशैली अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों से एक साफ-सुथरा, हरा-भरा और टिकाऊ जम्मू-कश्मीर बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, पर्यावरण की रक्षा करना सिर्फ़ सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं है यह सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सब मिलकर जम्मू-कश्मीर की अनमोल प्राकृतिक विरासत को बचा सकते हैं और अपने बच्चों के लिए एक हरा-भरा भविष्य छोड़ सकते हैं।