श्रीनगर। कश्मीर घाटी में सेब के मुख्य सीजन की शुरुआत से पहले ही कोल्ड स्टोरेज फुल हो चुके हैं। जिन बागवानों ने समय रहते पहले से जगह आरक्षित नहीं कराई थी, वे अब अपनी तैयार फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज यूनिटों के चक्कर काट रहे हैं। पिछले सीजन के कड़वे और मीठे अनुभवों ने इस बार की पूरी व्यवस्था को बदल कर रख दिया है। पिछले साल पीक आवक के दौरान मंडियों में सेब के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि जिन उत्पादकों ने तुरंत बेचने के बजाय अपनी फसल कोल्ड स्टोरेज में रखी थी, उन्हें बाद में बाजार सुधरने पर काफी बेहतर और मुनाफे वाले दाम मिले थे। इसी आर्थिक लाभ को देखते हुए इस साल किसानों ने महीनों पहले से ही स्टोरेज स्पेस बुक करना शुरू कर दिया था।
कोल्ड स्टोरेज संचालकों के अनुसार इस साल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा पिछले सीजन का पुराना स्टॉक खाली होते ही यानी कई महीने पहले आरक्षित करा लिया गया था। पिछले कुछ हफ्तों में जो थोड़ी-बहुत खाली जगह बची थी, वह भी अब पूरी तरह भर चुकी है। घाटी की अधिकांश यूनिट्स अगले हफ्ते से नई फसल की आवक स्वीकार करने की तैयारी कर रही हैं। संचालकों का कहना है कि इस बार किसानों का रुझान अभूतपूर्व रहा है। बुनियादी ढांचा सीमित होने के कारण उत्पादक आखिरी वक्त का इंतजार करने का जोखिम नहीं उठा सकते थे, जिससे समय रहते बुकिंग न करा पाने वाले छोटे किसानों के लिए दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं।
स्थानीय बागवानों के लिए कोल्ड स्टोरेज बुक कराना अब महज एक विकल्प नहीं, बल्कि बाजार में टिके रहने की अनिवार्य जरूरत बन चुका है। एक स्थानीय किसान सज्जाद अहमद ने कहा कि जब मुख्य सीजन में मंडियों में एक साथ भारी आवक होती है तो मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है और कीमतें धड़ाम से नीचे गिर जाती हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बार-बार होने वाले भूस्खलन और यातायात बाधित होने से भी माल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे दाम और टूट जाते हैं। ऐसे संकट के समय जिन किसानों के पास भंडारण की सुविधा होती है, वे अपनी पूरी फसल एक साथ औने-पौने दामों में बेचने के बजाय उसे सुरक्षित रख लेते हैं और बाजार में सुधार का इंतजार करते हैं।
कोल्ड स्टोरेज की सरकारी क्षमता बढ़ाने की मांग
एक अन्य किसान शारिक नजीर ने कहा कि हमारा मानना है कि केवल कोल्ड स्टोरेज ही बागवानी क्षेत्र की सभी समस्याओं का मुकम्मल हल नहीं हो सकता। कोल्ड स्टोरेज क्षमता का सीमित होना छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, जिनके पास महीनों पहले अग्रिम भुगतान कर जगह बुक करने के संसाधन नहीं होते। किसानों ने घाटी में सीए और कोल्ड स्टोरेज की सरकारी क्षमता बढ़ाने, तुड़ाई के पीक सीजन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रकों की निर्बाध आवाजाही की गारंटी देने और पारदर्शी बाजार सूचना प्रणाली विकसित करने की मांग उठाई है। मौजूदा हालात यह साफ बयां करते हैं कि कश्मीर की सेब आर्थिकी में अब जोखिम प्रबंधन के लिए आधुनिक भंडारण व्यवस्था सबसे अहम कड़ी बन चुकी है।