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जम्मू-कश्मीर पूरी तरह स्वायत्त इकाई नहीं सेंतूर होटल मामले में यथास्थिति का आदेश

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कहा है कि अपने कामकाज के मामले में जम्मू-कश्मीर पूरी तरह स्वतंत्र इकाई नहीं है। सेंतूर लेक व्यू होटल का पट्टा रद्द करने का मामला केंद्र और प्रदेश सरकार के दो अंगों के बीच का मामला है। अत: केंद्र सरकार को इस विवाद को सौहार्द पूर्ण ढंग से हल करने के लिए कैबिनेट सचिव के माध्यम से विवाद निपटाने के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने कहा, जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक पट्टे के संबंध में यथास्थिति रहेगी।
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न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने वीरवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तत्वावधान में काम करने वाले होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की याचिका का निस्तारण करते हुए कैबिनेट सचिव को चार सप्ताह के भीतर समिति बनाने के लिए कहा है। अदालत ने कहा कि होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड निर्विवाद रूप से एक स्वायत्त निकाय/सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जो भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है। मामले में एक पक्ष केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर सरकार है। जो भारत के संविधान के तहत भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन है। अदालत ने कहा कि इस तथ्य में कोई विवाद नहीं है कि पट्टे पर दिया गया परिसर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्य की संपत्ति थी और इसे 1982 में निगम को 99 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दिया गया था। 25 अप्रैल 2022 को प्रदेश सरकार ने पट्टा रद्द कर दिया।
अदालत ने आगे कहा कि 31 अक्तूबर 2019 से प्रभावी जम्मू - कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के माध्यम से पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के साथ कर दिया गया जो अन्य केंद्रशासित प्रदेशों की तरह जम्मू-कश्मीर सीधे राष्ट्रपति द्वारा शासित है। पुनर्गठन अधिनियम का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर अपने कामकाज में पूरी तरह से स्वायत्त इकाई नहीं है और यह भी इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि जम्मू - कश्मीर सरकार के मामलों की निगरानी और नियंत्रण भारत सरकार द्वारा गृह मंत्रालय के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर कामकाज के मामले में स्वतंत्र इकाई नहीं है।
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कमेटी दो माह में अपने निर्णय को अंतिम रूप देगी
अदालत ने कहा- सेंतूर लेक व्यू होटल नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पूरी तरह से स्वामित्व वाला नियंत्रित और प्रशासित एक स्वायत्त निकाय है। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर उप राज्यपाल के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रशासित है। जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से होटल को पट्टे की समाप्ति और बेदखली नोटिस जारी करना भारत सरकार के दो अंगों के बीच का विवाद है। अदालत ने केंद्र से अपने कैबिनेट सचिव के माध्यम से नागरिक उड्डयन सचिव, गृह सचिव की सदस्यता वाली एक समिति गठित करने के लिए कहा है। समिति सभी हितधारकों को सुनेगी और दो महीने की अवधि के भीतर अपने निर्णय को अंतिम रूप देगी।
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